• Write with us
  • Advertise with us
  • Liability Disclaimer

Primary Ka Master ● Com - प्राइमरी का मास्टर ● कॉम

एक छतरी के नीचे 'प्राइमरी का मास्टर' की समस्त ऑनलाइन सेवाएँ

केस स्टडी विधि के उद्देश्य, विशेषताएं और इस विधि की उपयोगितायेँ

  •  विद्यार्थी स्वतंत्र होकर, स्वयं ही सृजनात्मक ढंग से समस्या पर विचार कर सकेंगें।
  •  वे समस्या समाधान ( Problem based learning )तक पहुंचने में सक्रिय हो  सकेंगें।
  •  वे अपने पूर्व ज्ञान का प्रयोग करते हुए प्रमाणों को संग्रह कर सकेंगें।
  •  घटनाक्रम में नवीन तथ्यों को जान सकेंगे।
  •  स्वयं अपने अनुभव से सीखते हुए ज्ञान प्राप्त कर सकेंगें।
  •  व्यक्तिगत, सामाजिक संबंधों को उत्तम ढंग से स्थापित कर सकेंगे।
  •  छात्रों में अभिप्रेरण एवं अभिव्यक्ति की क्षमता में वृद्धि हो सकेगी।
  •  छात्रों की उपलब्धियों का मूल्यांकन हो सकेगा।

case study of child in hindi

व्यक्तिगत अध्ययन छात्रों को एक सार्थक ज्ञान प्रदान करता है जिसका प्रयोग विभिन्न प्रकार के समाधान या अध्ययन के लिए किया जाता है। यह एक जटिल अधिगम का स्वरूप होता है। इसमें  सृजनात्मक चिन्तन निहित होता है और चिन्तन स्तर पर शिक्षण की व्यवस्था होती है।

case study of child in hindi

Post a Comment

case study of child in hindi

Case of study child ka farmet kaise taiyar krein

Listrovert

Case Study in Hindi Explained – केस स्टडी क्या है और कैसे करें

Tomy Jackson

आपने अक्सर अपने स्कूल या कॉलेज में केस स्टडी के बारे में सुना होगा । खासकर कि Business Studies और Law की पढ़ाई पढ़ रहे छात्रों को कैसे स्टडी करने के लिए कहा जाता है । पर case study kya hai ? इसे कैसे करते हैं , इसके फायदे क्या हैं ? इस आर्टिकल में आप इन सभी प्रश्नों के बारे में विस्तार से जानेंगे ।

Case study in Hindi explained के इस पोस्ट में आप न सिर्फ केस स्टडी के बारे में विस्तार से जानेंगे बल्कि इसके उदाहरणों और प्रकार को भी आप विस्तार से समझेंगे । यह जरूरी है कि आप इसके बारे में सही और विस्तृत जानकारी प्राप्त करें ताकि आपको कभी कोई समस्या न हो । तो चलिए विस्तार से इसके बारे में जानते हैं :

Case Study in Hindi

Case Study एक व्यक्ति , समूह या घटना का गहन अध्ययन है । एक केस स्टडी में , किसी भी घटना या व्यक्ति का सूक्ष्म अध्ययन करके उसके व्यवहार के बारे में पता लगाया जाता है । एजुकेशन , बिजनेस , कानून , मेडिकल इत्यादि क्षेत्रों में केस स्टडी की जाती है ।

case study सिर्फ और सिर्फ एक व्यक्ति , घटना या समूह को केंद्र में रखकर किया जाता है और यह उचित भी है । इसकी मदद से आप सभी के लिए एक ही निष्कर्ष नहीं निकाल सकते । उदहारण के तौर पर , एक बिजनेस जो लगातार घाटा झेल रहा है उसकी केस स्टडी की जा सकती है । इसमें सभी तथ्यों को मिलाकर , परखकर यह जानने की कोशिश होती है कि क्यों बिजनेस लगातार loss में जा रही है ।

परंतु , जरूरी नहीं कि जिस वजह से यह पार्टिकुलर कम्पनी घाटा झेल रही हो , अन्य कंपनियों के घाटे में जाने की यही वजह हो । इसलिए कहा जाता है कि किसी एक मामले के अध्ययन से निकले निष्कर्ष को किसी अन्य मामले पर थोपा नहीं जा सकता । इस तरह आप case study meaning in Hindi समझ गए होंगे ।

Case Study examples in Hindi

अब जबकि आपने case study kya hai के बारे में जान लिया है तो चलिए इसके कुछ उदाहरणों को भी देख लेते हैं । इससे आपको केस स्टडी के बारे में जानने में अधिक मदद मिलेगी ।

ऊपर के उदाहरण को देख कर आप समझ सकते हैं कि case study क्या होती है । अब आप ऊपर दिए case पर अच्छे से study करेंगे तो यह केस स्टडी कहलाएगी यानि किसी मामले का अध्ययन । पर केस स्टडी कैसे करें ? अगर हमारे पास ऊपर दिए उदाहरण का केस स्टडी करने को दिया जाए तो यह कैसे करना होगा ? चलिए जानते हैं :

Case Study कैसे करें ?

अब यह जानना जरूरी है कि एक case study आखिर करते कैसे हैं और किन tools का उपयोग किया जाता है । तो एक केस स्टडी करने के लिए आपको ये steps फॉलो करना चाहिए :

Infographic on case study in Hindi

1. सबसे पहले केस को अच्छे से समझें

अगर आप किसी भी केस पर स्टडी करना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले उसकी बारीकियों और हर एक डिटेल पर ध्यान देना चाहिए । तभी आप आगे बढ़ पाएंगे और सही निर्णय भी ले पाएंगे । Case को अच्छे से समझने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसपर स्टडी करते समय आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती । केस को अच्छे से समझने के लिए आप यह कर सकते हैं :

  • Important points को हाईलाइट करें
  • जरूरी समस्याओं को अंडरलाइन करें
  • जरूरी और बारीकियों का नोट्स तैयार करें

2. अपने विश्लेषण पर ध्यान दें

Case Study करने के लिए जरूरी है कि आप अपने analysis पर ध्यान दें ताकि बढ़िया रिजल्ट मिल सके । इसके लिए आप विषय के 2 से 5 मुख्य बिंदुओं / समस्याओं को उठाएं और बारीकी से उनके बारे में जानकारी इकट्ठा करें । इसके बारे में पता करें कि ये क्यों exist करती है और संस्था पर इनका क्या प्रभाव है ।

आप उन समस्याओं के लिए जिम्मेदार कारकों पर भी नजर डालें और सभी चीजों को ढंग से समझने की कोशिश करें तभी जाकर आप सही मायने में case study कर पाएंगे ।

3. संभव समाधानों के बारे में सोचें

किसी भी केस स्टडी का तीसरा महत्वपूर्ण पड़ाव है कि आप समस्या के संभावित समाधानों के बारे में सोचें ।इसके लिए आप discussions , research और अपने अनुभव की मदद ले सकते हैं । ध्यान रहें कि सभी समाधान संभव हों ताकि उन्हें लागू किया जा सके ।

4. बेहतरीन समाधान का चुनाव करें

केस स्टडी का अंतिम पड़ाव मौजूदा समाधानों में से एक सबसे बेहतरीन समाधान का चुनाव करना है । आप सभी समाधानों को एक साथ तो बिल्कुल भी implement नहीं कर सकते इसलिए जरूरी है कि बेहतरीन को चुनें ।

Case Study format

case study of child in hindi

अगर आप YouTube video की मदद से देखकर सीखना चाहते हैं कि Case Study कैसे बनाएं तो नीचे दिए गए Ujjwal Patni की वीडियो देख सकते हैं ।

इस पोस्ट में आपने विस्तार से case study meaning in Hindi के बारे में जाना । अगर कोई प्वाइंट छूट गया हो तो कॉमेंट में जरूर बताएं और साथ ही पोस्ट से जुड़ी राय या सुझाव भी आप कॉमेंट में दे सकते हैं । पोस्ट पसंद आया हो और हेल्पफुल साबित हुई हो तो शेयर जरूर करें ।

  • लड़कियों / महिलाओं केआई घर बैठे job ideas
  • Petrochemical के बारे में पूरी जानकारी
  • Print और electronic media के विभिन्न साधन
  • Blog meaning in Hindi क्या है

' src=

I have always had a passion for writing and hence I ventured into blogging. In addition to writing, I enjoy reading and watching movies. I am inactive on social media so if you like the content then share it as much as possible .

Related Posts

Escrow account meaning in hindi – एस्क्रो अकाउंट क्या है, personality development course free in hindi – पर्सनैलिटी डेवलपमेंट, iso certificate क्या होता है आईएसओ सर्टिफिकेट के फायदे और उपयोग.

' src=

nice info sir thanks

' src=

Thanks. It is really very helpful.

' src=

I’m glad to know that you found this post about case study helpful! Keep visiting.

Leave A Reply Cancel Reply

Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

InstaPDF

Case Study Of A School Child Hindi PDF

PDF Name
No. of Pages
PDF Size
Language
PDF Category
Last Updated
Source / Credits
Uploaded ByPradeep

Case Study Of A School Child Hindi

Case Study Of A School Child Hindi

A case study is a written account that gives detailed information about a person, group, or thing and their development over a period of time. Your draft should contain at least 4 sections: an introduction; a body where you should include background information, an explanation of why you decided to do this case study, and a presentation of your main findings; a conclusion where you present data; and references

केस स्टडी का मुख्य उद्देश्य बच्चों के सभी पक्षों से भली भांति परिचित होना है l जैसे कि बच्चों में छुपी हुई कमजोरी को उजागर करना, पढाई में अभिरुचि का कम होना, विद्यालय के गतिविधियों में हिस्सा न लेना, विद्यालय से अनुपस्थित रहना इत्यादि कारणों का पता लगा कर उसे दूर करने का प्रयास तथा उनमें सकारात्मक पहलुओं का विकास करना इस केस स्टडी का मुख्य उद्देश्य है l

अ) छात्र का विवरण 

1. छात्र का नाम:………………………………………………………… 2. जन्म तिथि:………………………………………………………… 3. पुरुष / महिला:………………………………………………………… 4. अभिभावक / संरक्षक : : पिता:………………………………………………. माता:……………………………………………….. अभिभावक:………………………………………….. 5. कक्षा जिसमें अध्ययनरत है:………………………………………………………… 6. पत्र व्यवहार का पता:………………………………………………………………… …………………………………………………………………………………………………. 7. माता – पिता / अभिभावक की मासिक आय:……………………………………. 8. पिता / अभिभावक का कार्यक्षेत्र और शैक्षिक योग्यता:…………………………. 9. माँ का कार्यक्षेत्र और योग्यता:………………………………………………………. 10. संख्या:………………………..भाई ………………………बहन 11. अपने भाई बहनों के बीच की मूल स्थिति (बड़ा / मझला / छोटा ):……..

You can download the Case Study Of A School Child Hindi PDF using the link given below.

2nd Page of Case Study Of A School Child Hindi PDF

Case Study Of A School Child Hindi PDF Download Free

REPORT THIS If the purchase / download link of Case Study Of A School Child Hindi PDF is not working or you feel any other problem with it, please REPORT IT by selecting the appropriate action such as copyright material / promotion content / link is broken etc. If this is a copyright material we will not be providing its PDF or any source for downloading at any cost.

SIMILAR PDF FILES

case study of child in hindi

Prateek Shivalik

Prateek Shivalik

#Free Educational Notes

What-Is-Case-Study-Method-In-Hindi

What Is Case Study Method In Hindi? PDF

What is case study method in hindi.

What Is Case Study Method In Hindi? PDF Download, व्यक्तिगत अध्ययन , मामले का अध्ययन, केस स्टडी आदि के बारे में जानेंगे। इन नोट्स के माध्यम से आपके ज्ञान में वृद्धि होगी और आप अपनी आगामी परीक्षा को पास कर सकते है | Notes के अंत में PDF Download का बटन है | तो चलिए जानते है इसके बारे में विस्तार से |

  • सामाजिक अनुसंधान पद्धतियों के विशाल परिदृश्य में, केस स्टडी पद्धति मानव व्यवहार और अनुभवों की जटिल जटिलताओं को समझने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में सामने आती है।
  • व्यक्तिगत जीवन या उनके वास्तविक जीवन के संदर्भ में विशिष्ट घटनाओं में गहराई से उतरकर, यह विधि अद्वितीय अंतर्दृष्टि प्रदान करती है जो अक्सर मात्रात्मक विश्लेषण से बच जाती है। यह लेख केस स्टडी पद्धति के सार की पड़ताल करता है, इसकी ताकत, अनुप्रयोगों और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में इसके प्रभाव पर प्रकाश डालता है।

केस स्टडीज को समझना: परिभाषा और उदाहरण

(understanding case studies: definition and examples).

शब्द “CASE” बहुआयामी है और इसका उपयोग कानून, चिकित्सा और मनोविज्ञान सहित हमारे दैनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं में होता है। प्रत्येक संदर्भ में, यह शब्द किसी व्यक्ति के बारे में जानकारी एकत्र करने से जुड़ा है ताकि उनके सामने आने वाले मुद्दों या समस्याओं को हल करने में उनकी सहायता की जा सके। यह सिद्धांत मनोविज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में भी लागू होता है, जहां मनोवैज्ञानिक या शैक्षिक चुनौतियों का सामना करने वाले व्यक्तियों की विस्तार से जांच की जाती है। उनके अतीत, वर्तमान और संभावित भविष्य को शामिल करते हुए इस व्यापक विश्लेषण को केस स्टडी कहा जाता है।

  • व्यक्तिगत अध्ययन , जिसे आमतौर पर केस स्टडी कहा जाता है, सामाजिक अनुसंधान में डेटा संग्रह की एक मौलिक विधि है, जिसका व्यापक रूप से विभिन्न सामाजिक विज्ञानों में उपयोग किया जाता है।
  • इसमें एक विशिष्ट सामाजिक इकाई का गहन विश्लेषण शामिल है, जिसमें व्यक्तियों, परिवारों, समूहों, संस्थानों, समुदायों, नस्लों, राष्ट्रों, सांस्कृतिक क्षेत्रों या ऐतिहासिक युगों को शामिल किया जा सकता है।
  • इस पद्धति की तुलना अक्सर ‘सामाजिक माइक्रोस्कोप’ से की जाती है क्योंकि यह शोधकर्ताओं को उल्लेखनीय गहराई के साथ सामाजिक घटनाओं का पता लगाने में सक्षम बनाता है, जिससे जटिल विवरण सामने आते हैं जो अन्य शोध विधियों के माध्यम से अस्पष्ट रह सकते हैं।
  • आम ग़लतफ़हमी के विपरीत कि, यह केवल व्यक्तिगत गतिविधियों और जीवन इतिहास पर केंद्रित है, केस अध्ययन पद्धति अपना दायरा विभिन्न सामाजिक इकाइयों तक बढ़ाती है। शोधकर्ता इस दृष्टिकोण का उपयोग चुनी हुई इकाई के सभी पहलुओं की सावधानीपूर्वक जांच करने के लिए करते हैं, जिससे यह एक व्यापक और विस्तृत अध्ययन बन जाता है।
  • केस अध्ययनों के माध्यम से, सामाजिक वैज्ञानिक छिपी हुई बारीकियों को उजागर करते हैं, जो मानव व्यवहार, सामाजिक संरचनाओं और सांस्कृतिक गतिशीलता की जटिलताओं में अमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।

केस स्टडी के मुख्य तत्व

(key elements of a case study).

1. केस स्टडी की परिभाषा (Definition of a Case Study):

  • एक केस स्टडी में किसी व्यक्ति की शैक्षिक या मनोवैज्ञानिक समस्या का गहन अन्वेषण शामिल होता है, जिसमें उनका इतिहास, वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाएं शामिल होती हैं।
  • उदाहरण: सीखने में कठिनाइयों का सामना कर रहे एक छात्र की जांच करना ताकि उसके कारणों, वर्तमान सीखने के माहौल और अकादमिक रूप से सफल होने में मदद करने के लिए संभावित हस्तक्षेपों को समझा जा सके।

2. कानूनी और चिकित्सीय मामलों में समानताएँ (Similarities to Legal and Medical Cases):

  • उसी तरह, जैसे एक वकील एक कानूनी मामले का अध्ययन करता है और एक डॉक्टर एक मरीज के मामले का मूल्यांकन करता है, मनोवैज्ञानिक और शिक्षक मनोवैज्ञानिक या शैक्षिक चुनौतियों का सामना करने वाले व्यक्ति के मामले की जांच करते हैं।
  • उदाहरण: एक मनोवैज्ञानिक व्यवहार संबंधी मुद्दों वाले बच्चे के मामले में पारिवारिक पृष्ठभूमि, स्कूल के माहौल और बच्चे की भावनात्मक स्थिति जैसे कारकों पर विचार करता है।

3. डेटा संग्रह और विश्लेषण (Data Collection and Analysis):

  • केस अध्ययन में विभिन्न प्रकार के डेटा एकत्र करना शामिल है, जिसमें साक्षात्कार, अवलोकन, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और अकादमिक रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं।
  • उदाहरण: शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों के साथ साक्षात्कार के माध्यम से जानकारी एकत्र करना, साथ ही कक्षा में छात्र के शैक्षणिक प्रदर्शन और व्यवहार का विश्लेषण करना।

4. विस्तृत समझ (Comprehensive Understanding):

  • केस अध्ययन का उद्देश्य व्यक्ति की अद्वितीय परिस्थितियों और अनुभवों को ध्यान में रखते हुए उसकी समस्या की समग्र समझ प्रदान करना है।
  • उदाहरण: एक किशोर के स्कूल से इनकार करने के मामले का अध्ययन करना, न केवल शैक्षणिक दबाव बल्कि सामाजिक संपर्क, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक गतिशीलता पर भी विचार करना।

5. समस्या-समाधान दृष्टिकोण (Problem-Solving Approach):

  • सकारात्मक परिणामों को बढ़ावा देने के लिए व्यक्ति की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप प्रभावी समाधानों और हस्तक्षेपों की पहचान करने के लिए केस अध्ययनों का उपयोग किया जाता है।
  • उदाहरण: एक व्यापक केस अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर ध्यान घाटे की सक्रियता विकार (ADHD: Attention Deficit Hyperactivity Disorder) वाले छात्र के लिए एक व्यक्तिगत शिक्षा योजना विकसित करना।

निष्कर्ष: शिक्षा और मनोविज्ञान में केस अध्ययन व्यक्तियों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने और उनका समाधान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समग्र दृष्टिकोण अपनाकर और किसी व्यक्ति के इतिहास, वर्तमान स्थिति और संभावित भविष्य में गहराई से जाकर, मनोवैज्ञानिक और शिक्षक लक्षित हस्तक्षेप विकसित कर सकते हैं, जो अंततः व्यक्ति की वृद्धि, विकास और कल्याण को सुविधाजनक बना सकता है।

What-Is-Case-Study-Method-In-Hindi

केस स्टडी क्या है?

(what is a case study).

केस स्टडी एक शोध पद्धति है जो किसी विशिष्ट व्यक्ति का उसके प्राकृतिक वातावरण में अध्ययन करने पर केंद्रित होती है। यह दृष्टिकोण शोधकर्ताओं को व्यक्ति के व्यवहार और व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं में व्यापक अंतर्दृष्टि प्राप्त करने की अनुमति देता है। व्यक्ति की संपूर्णता में जांच करके, केस अध्ययन वास्तविक जीवन के संदर्भ में मानव व्यवहार की गहरी समझ प्रदान करते हैं।

1. व्यवहार अध्ययन की विधि (Method of Behavior Study):

  • केस स्टडीज़ मानव व्यवहार का अध्ययन करने के लिए नियोजित अनुसंधान विधियां हैं। शोधकर्ता अपने वातावरण में व्यक्ति के कार्यों, प्रतिक्रियाओं और अंतःक्रियाओं का बारीकी से निरीक्षण और विश्लेषण करते हैं।
  • उदाहरण: एक मनोवैज्ञानिक एक किशोर में सामाजिक चिंता विकार को समझने के लिए एक केस स्टडी कर रहा है, और विभिन्न सामाजिक स्थितियों में उनके व्यवहार का अवलोकन कर रहा है।

2. किसी विशेष व्यक्ति पर ध्यान दें (Focus on a Particular Person):

  • केस अध्ययन किसी समूह या जनसंख्या के बजाय किसी विशिष्ट व्यक्ति पर ध्यान केंद्रित करते हैं। यह केंद्रित दृष्टिकोण शोधकर्ताओं को किसी व्यक्ति के व्यवहार की जटिलताओं को गहराई से समझने की अनुमति देता है।
  • उदाहरण : ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार वाले बच्चे के मामले का अध्ययन करके उनकी अनूठी चुनौतियों, संचार पैटर्न और सामाजिक संपर्कों का पता लगाना।

3. प्राकृतिक पर्यावरण के भीतर अध्ययन (Study within the Natural Environment):

  • केस अध्ययन व्यक्ति के प्राकृतिक वातावरण में आयोजित किए जाते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि एकत्र किए गए अवलोकन और डेटा उनके विशिष्ट व्यवहार के प्रतिनिधि हैं।
  • उदाहरण: कक्षा सेटिंग में एक शिक्षक का अवलोकन करके उनकी शिक्षण विधियों, छात्रों की बातचीत और कक्षा प्रबंधन तकनीकों को समझना।

4. व्यवहार और व्यक्तित्व की व्यापक समझ (Comprehensive Understanding of Behavior and Personality):

  • केस अध्ययन का उद्देश्य व्यक्ति के व्यवहार और व्यक्तित्व के सभी पहलुओं के बारे में जानकारी इकट्ठा करना है। इसमें उनके विचार, भावनाएँ, कार्य और विभिन्न उत्तेजनाओं के प्रति प्रतिक्रियाएँ शामिल हैं।
  • उदाहरण: पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTHD) वाले एक वयस्क के मामले का विश्लेषण करके उनके ट्रिगर्स, मुकाबला करने के तंत्र और समग्र मनोवैज्ञानिक कल्याण का पता लगाना।

5. व्यवहार विज्ञान में अनुप्रयोग (Applications in Behavioral Sciences):

  • अद्वितीय या दुर्लभ घटनाओं का पता लगाने के लिए मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, शिक्षा और संबंधित क्षेत्रों में केस स्टडीज का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, जो सिद्धांत विकास और व्यावहारिक अनुप्रयोगों के लिए मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
  • उदाहरण: एक प्रतिभाशाली बच्चे की सीखने की ज़रूरतों को समझने और उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए उचित शैक्षिक रणनीतियाँ विकसित करने के लिए उन पर एक केस अध्ययन आयोजित करना।

निष्कर्ष: केस अध्ययन उनके प्राकृतिक वातावरण में विशिष्ट व्यक्तियों पर ध्यान केंद्रित करके मानव व्यवहार और व्यक्तित्व को समझने में एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में कार्य करता है। यह विधि शोधकर्ताओं को व्यवहार की जटिलताओं का पता लगाने की अनुमति देती है, व्यवहार विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में अकादमिक अनुसंधान और व्यावहारिक हस्तक्षेप दोनों के लिए मूल्यवान ज्ञान प्रदान करती है।

Also Read: CTET COMPLETE NOTES IN HINDI FREE DOWNLOAD

शिक्षा में केस स्टडी क्या है?

(what is case study in education).

शिक्षा में केस स्टडी एक विशिष्ट शैक्षिक स्थिति, परिदृश्य या समस्या की विस्तृत और गहन जांच है। इसमें किसी शैक्षिक सेटिंग, जैसे स्कूल, कक्षा या शैक्षिक कार्यक्रम के भीतर वास्तविक जीवन की घटनाओं का व्यापक अनुसंधान और विश्लेषण शामिल है। शिक्षा में केस अध्ययन शिक्षण, सीखने और शैक्षिक प्रशासन में शामिल जटिलताओं की सूक्ष्म समझ प्रदान करते हैं।

शिक्षा में केस स्टडीज की मुख्य विशेषताएं

(key characteristics of case studies in education).

1. वास्तविक जीवन शैक्षिक संदर्भ (Real-Life Educational Context):

  • शिक्षा में केस अध्ययन शैक्षिक वातावरण के भीतर वास्तविक जीवन की स्थितियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। ये परिस्थितियाँ कक्षा की चुनौतियों से लेकर स्कूल-व्यापी नीतियों और हस्तक्षेपों तक हो सकती हैं।
  • उदाहरण: एक विशिष्ट ग्रेड-स्तरीय कक्षा में एक नई शिक्षण पद्धति के कार्यान्वयन का विश्लेषण करना।

2. गहन जांच (In-Depth Investigation):

  • केस अध्ययन में चुने गए शैक्षणिक मामले की गहन जांच शामिल होती है। शोधकर्ता गहरी अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए साक्षात्कार, अवलोकन, सर्वेक्षण और दस्तावेज़ विश्लेषण जैसे विभिन्न तरीकों के माध्यम से डेटा एकत्र करते हैं।
  • उदाहरण: शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों के साथ साक्षात्कार आयोजित करना, कक्षा की गतिविधियों का अवलोकन करना और छात्र प्रदर्शन डेटा का विश्लेषण करना।

3. बहुआयामी परिप्रेक्ष्य (Multifaceted Perspective):

  • केस अध्ययन कई दृष्टिकोणों पर विचार करता है, जिनमें शिक्षक, छात्र, प्रशासक और कभी-कभी माता-पिता या समुदाय के सदस्य शामिल होते हैं। यह समग्र दृष्टिकोण शैक्षिक मुद्दे का एक सर्वांगीण दृष्टिकोण प्रदान करता है।
  • उदाहरण: समावेशी शिक्षा के लिए स्कूल के दृष्टिकोण का अध्ययन करते समय शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों के दृष्टिकोण की जांच करना।

4. समस्या-समाधान पर ध्यान (Problem-Solving Focus):

  • शिक्षा में केस अध्ययन अक्सर समस्याओं, चुनौतियों या सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने के लिए आयोजित किए जाते हैं। शोधकर्ता इन मुद्दों के समाधान के लिए संभावित समाधान और रणनीतियों का पता लगाते हैं।
  • उदाहरण: कम छात्र सहभागिता स्तर की जांच करना और कक्षा में भागीदारी और सीखने में रुचि बढ़ाने के लिए रणनीतियों का प्रस्ताव करना।

5. समृद्ध गुणात्मक डेटा (Rich Qualitative Data):

  • शैक्षिक मामले का विस्तृत विवरण प्रदान करने के लिए शोधकर्ता आख्यानों, उद्धरणों और टिप्पणियों सहित समृद्ध गुणात्मक डेटा इकट्ठा करते हैं। गुणात्मक निष्कर्षों का समर्थन करने के लिए मात्रात्मक डेटा को भी शामिल किया जा सकता है।
  • उदाहरण: व्यापक केस स्टडी रिपोर्ट बनाने के लिए कक्षा अवलोकन नोट्स के साथ छात्र और शिक्षक प्रशंसापत्र का उपयोग करना।

6. शैक्षिक प्रथाओं को सूचित करना (Informing Educational Practices):

  • केस स्टडीज के निष्कर्ष शैक्षिक प्रथाओं, नीतिगत निर्णयों और निर्देशात्मक तरीकों की जानकारी देते हैं। शिक्षक, प्रशासक और नीति निर्माता साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने के लिए इन अंतर्दृष्टि का उपयोग कर सकते हैं।
  • उदाहरण: शिक्षकों के लिए व्यावसायिक विकास कार्यशालाओं का मार्गदर्शन करने के लिए प्रभावी शिक्षण विधियों पर एक केस अध्ययन के परिणामों का उपयोग करना।

निष्कर्ष: शिक्षा में केस अध्ययन शैक्षिक प्रणाली के भीतर चुनौतियों और अवसरों की गहन समझ प्रदान करते हैं। विशिष्ट मामलों में गहराई से जाकर, शिक्षक और शोधकर्ता मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्राप्त कर सकते हैं, शिक्षण और सीखने की प्रथाओं में निरंतर सुधार और नवाचार को बढ़ावा दे सकते हैं। ये अध्ययन जटिल शैक्षिक समस्याओं के साक्ष्य-आधारित समाधान प्रदान करके शिक्षा के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

केस स्टडी में व्यक्ति के बारे में क्या जानकारी एकत्र की जानी चाहिए?

(what information should be collected about the person in the case study).

किसी मामले का अध्ययन करते समय, जांच के अधीन व्यक्ति के बारे में विशिष्ट जानकारी एकत्र करना गहन और व्यावहारिक विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है। यह जानकारी व्यक्ति की पृष्ठभूमि, क्षमताओं, व्यवहार और व्यक्तिगत लक्षणों का समग्र दृष्टिकोण प्रदान करती है। इस संदर्भ में, एक व्यापक केस अध्ययन बनाने के लिए कई श्रेणियों के डेटा को एकत्र करने और उनका विश्लेषण करने की आवश्यकता है।

यहां उदाहरणों के साथ प्रत्येक श्रेणी का स्पष्टीकरण दिया गया है:

1. Identifying Data (परिचयात्मक विवरण): इस श्रेणी में व्यक्ति के बारे में बुनियादी जानकारी शामिल है, जैसे उनका नाम, उम्र, लिंग, पता, संपर्क विवरण और कोई अन्य प्रासंगिक व्यक्तिगत पहचान विवरण। ये विवरण यह समझने के लिए आधार प्रदान करते हैं कि व्यक्ति कौन है।

  • नाम: जॉन स्मिथ
  • लिंग: पुरुष
  • पता: 123 मेन स्ट्रीट, एनीटाउन, यूएसए
  • फ़ोन नंबर: (555) 123-4567

2. Birth Information (जन्म सम्बन्धी जानकारी): इस श्रेणी में व्यक्ति के जन्म से संबंधित विवरण शामिल हैं, जिसमें उनकी जन्मतिथि, जन्म स्थान और उनके जन्म के आसपास की कोई भी महत्वपूर्ण घटना या परिस्थितियाँ शामिल हैं।

  • जन्मतिथि: 10 जून 1998
  • जन्म स्थान: सिटी जनरल हॉस्पिटल, एनीटाउन, यूएसए

3. Health Record (स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी): इस अनुभाग में व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी एकत्र करना शामिल है। इसमें चिकित्सा इतिहास, वर्तमान स्वास्थ्य स्थितियां, दवाएं, एलर्जी और कोई भी प्रासंगिक स्वास्थ्य मूल्यांकन या निदान शामिल हो सकता है।

  • चिकित्सा इतिहास : बचपन से अस्थमा
  • वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति: अवसाद और चिंता का प्रबंधन
  • एलर्जी: कोई नहीं

4. Family Data (परिवार सम्बन्धी जानकारी): यह श्रेणी व्यक्ति की पारिवारिक पृष्ठभूमि पर केंद्रित है, जिसमें माता-पिता, भाई-बहन और परिवार के अन्य करीबी सदस्यों के बारे में विवरण शामिल हैं। पारिवारिक गतिशीलता और रिश्तों पर जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।

  • माता-पिता: जेन स्मिथ (मां) और मार्क स्मिथ (पिता)
  • भाई-बहन: सारा (बड़ी बहन) और डेविड (छोटा भाई)

5. Socio- Economic Status (सामाजिक-आर्थिक स्थिति): यहां, आप व्यक्ति की आर्थिक और सामाजिक स्थिति, उनके व्यवसाय, आय, शैक्षिक पृष्ठभूमि और किसी भी प्रासंगिक सामाजिक-आर्थिक कारकों सहित डेटा एकत्र करते हैं।

  • व्यवसाय: पूर्णकालिक छात्र और अंशकालिक कैशियर
  • आय: $20,000 प्रति वर्ष
  • शैक्षिक पृष्ठभूमि: हाई स्कूल स्नातक

6. Level of Intelligence (बुद्धि का स्तर ): यह अनुभाग व्यक्ति की बौद्धिक क्षमताओं और संज्ञानात्मक कार्यप्रणाली का आकलन करता है। इसमें आईक्यू स्कोर, मानकीकृत परीक्षण परिणाम या बुद्धि के अन्य आकलन शामिल हो सकते हैं।

  • आईक्यू स्कोर: 120 (औसत से ऊपर)

7. Educational Records (शिक्षात्मक जानकारी): व्यक्ति के शैक्षणिक इतिहास से संबंधित जानकारी इकट्ठा करें, जिसमें स्कूल में पढ़ाई, ग्रेड, शैक्षणिक उपलब्धियां और किसी भी प्रासंगिक शैक्षणिक मूल्यांकन शामिल हैं।

  • हाई स्कूल: एनीटाउन हाई स्कूल
  • पुरस्कार: वेलेडिक्टोरियन

8. Co- Curricular Activities (पाठ्य सहगामी क्रियाएँ): इस श्रेणी में क्लब, खेल, शौक या स्वयंसेवी कार्य जैसे पाठ्येतर या सह-पाठयक्रम गतिविधियों में व्यक्ति की भागीदारी के बारे में विवरण शामिल हैं।

  • पाठ्येतर गतिविधियाँ: शतरंज क्लब, स्थानीय पशु आश्रय में स्वयंसेवक

9. Adjustment (समायोजन): इस बारे में जानकारी एकत्र करें कि व्यक्ति विभिन्न परिस्थितियों या वातावरणों में कैसे अनुकूलन और समायोजन करता है। इसमें उनके मुकाबला करने के तंत्र, तनाव कारक और परिवर्तन को संभालने के तरीके शामिल हो सकते हैं।

  • समायोजन: परिवर्तन और नए वातावरण के साथ संघर्ष करता है, दिनचर्या को प्राथमिकता देता है

10. Behaviour in the classroom (कक्षा- कक्ष में व्यवहार): यह अनुभाग शैक्षणिक सेटिंग में व्यक्ति के व्यवहार और प्रदर्शन की जांच करता है, जिसमें उनकी भागीदारी, शिक्षकों और साथियों के साथ बातचीत और सीखने की शैली शामिल है।

  • कक्षा व्यवहार: सक्रिय रूप से भाग लेता है, साथियों के साथ सहयोग करता है

11. Behaviour in the playground (खेल के मैदान में व्यवहार): गैर-शैक्षणिक सेटिंग्स में व्यक्ति के व्यवहार और बातचीत का पता लगाएं, जैसे कि अवकाश या खाली समय के दौरान। इससे उनके सामाजिक कौशल और रिश्तों के बारे में जानकारी मिल सकती है।

  • खेल का मैदान व्यवहार : टीम खेल खेलना पसंद करता है, और उसके करीबी दोस्तों का एक छोटा समूह है

12. Personality Traits (व्यक्तित्व के गुण): व्यक्ति के व्यक्तित्व लक्षणों के बारे में जानकारी एकत्र करें, जिसमें उनका स्वभाव, ताकत, कमजोरियां और किसी भी व्यक्तित्व का आकलन शामिल है।

  • व्यक्तित्व लक्षण: बहिर्मुखी, सहानुभूतिपूर्ण, विस्तार-उन्मुख

13. Educational and Vocational Plan (शैक्षिक तथा व्यावसायिक योजना): यह श्रेणी व्यक्ति के भविष्य के शैक्षिक और व्यावसायिक लक्ष्यों, आकांक्षाओं और कैरियर विकास या आगे की शिक्षा की योजनाओं की रूपरेखा तैयार करती है।

  • शैक्षिक योजना (Educational Plan): मनोविज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल करें
  • व्यावसायिक योजना (Vocational Plan): परामर्शदाता या चिकित्सक के रूप में कार्य करें
  • उदाहरण: पर्यावरण विज्ञान में डिग्री हासिल करने और एक पर्यावरण संरक्षण संगठन के लिए काम करने की इच्छा रखता है।

14. Analysis (विश्लेषण):

  • यह वह जगह है जहां आप सभी एकत्रित जानकारी का गहन विश्लेषण करते हैं, निष्कर्ष निकालते हैं और व्यक्ति के जीवन, व्यवहार और विशेषताओं में पैटर्न या रुझान की पहचान करते हैं।
  • उदाहरण: विश्लेषण इंगित करता है कि व्यक्ति के मजबूत नेतृत्व कौशल और पर्यावरण संरक्षण के जुनून को परामर्श कार्यक्रमों और पारिस्थितिकी और स्थिरता से संबंधित पाठ्येतर गतिविधियों के माध्यम से पोषित किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, जानकारी के इस व्यापक सेट को इकट्ठा करने से मामले के अध्ययन में व्यक्ति की पूरी समझ मिलती है, यदि आवश्यक हो तो सूचित निर्णय लेने और हस्तक्षेप की सुविधा मिलती है।

Also Read:  DSSSB COMPLETE NOTES IN HINDI (FREE)

केस स्टडी के चरण

(steps of case study).

एक केस स्टडी में किसी विशेष समस्या या परिदृश्य को समझने, विश्लेषण करने और हल करने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया शामिल होती है। ये चरण किसी केस अध्ययन को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए एक संरचित ढांचे के रूप में काम करते हैं। प्रत्येक चरण मामले की जटिलताओं को सुलझाने और सूचित निष्कर्ष पर पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

1. मामले को समझना (Understanding the Case):

  • परिभाषा: मामले की पृष्ठभूमि, संदर्भ और मुख्य विवरण को अच्छी तरह से समझें। इसमें शामिल बारीकियों की गहरी समझ हासिल करने के लिए स्थिति में खुद को डुबो देना शामिल है।
  • उदाहरण: छात्रों के प्रदर्शन में गिरावट की प्रवृत्ति से जुड़े मामले के अध्ययन के लिए, स्कूल की जनसांख्यिकी, शिक्षण विधियों और पाठ्यक्रम में हाल के बदलावों को समझना महत्वपूर्ण है।

2. समस्या का चयन (Selecting the Problem):

  • परिभाषा: मामले के भीतर उस विशिष्ट समस्या या मुद्दे को पहचानें और परिभाषित करें जिसे संबोधित करने की आवश्यकता है। इस कदम में गहन विश्लेषण के लिए मामले के एक विशेष पहलू पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है।
  • उदाहरण: समस्या की पहचान पिछले दो वर्षों में हाई स्कूल में छात्रों के गणित दक्षता अंकों में गिरावट के रूप में की जा सकती है।

3. समस्या के कारणों का पता लगाना (Finding Out the Causes of the Problem):

  • परिभाषा: पहचानी गई समस्या के मूल कारणों की जांच और विश्लेषण करें। इस चरण में समस्या में योगदान देने वाले विभिन्न कारकों की जांच करना शामिल है।
  • उदाहरण: कारणों में अप्रभावी शिक्षण विधियां, संसाधनों की कमी, अपर्याप्त शिक्षक प्रशिक्षण, या छात्रों की सीखने की क्षमताओं को प्रभावित करने वाले सामाजिक-आर्थिक कारक शामिल हो सकते हैं।

4. संभावित समाधानों के बारे में सोचना (Thinking of Possible Solutions):

  • परिभाषा: पहचाने गए कारणों के समाधान के लिए संभावित समाधानों या हस्तक्षेपों पर विचार-मंथन करें। रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करें और विभिन्न दृष्टिकोणों पर विचार करें।
  • उदाहरण: संभावित समाधानों में इंटरैक्टिव शिक्षण तकनीकों को लागू करना, पाठ्यपुस्तकें और शैक्षिक सॉफ्टवेयर जैसे अतिरिक्त संसाधन प्रदान करना, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन करना या सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम शुरू करना शामिल हो सकता है।

5. सर्वोत्तम समाधान का चयन (Selecting the Best Solution):

  • परिभाषा: मामले के संदर्भ के साथ व्यवहार्यता, प्रभावशीलता और संरेखण के आधार पर प्रस्तावित समाधानों का मूल्यांकन करें। वह समाधान चुनें जिससे समस्या का प्रभावी ढंग से समाधान होने की सबसे अधिक संभावना हो।
  • उदाहरण: प्रस्तावित समाधानों का मूल्यांकन करने के बाद, नियमित शिक्षक प्रशिक्षण सत्रों के साथ इंटरैक्टिव शिक्षण तकनीकों को लागू करना छात्रों को संलग्न करने और शिक्षक प्रभावशीलता को बढ़ाने की क्षमता के कारण सर्वोत्तम समाधान के रूप में चुना गया है।

6. मूल्यांकन करना (To Evaluate):

  • परिभाषा: चयनित समाधान को लागू करें और उसके प्रभाव की बारीकी से निगरानी करें। परिणामों का मूल्यांकन करें और मूल्यांकन करें कि क्या कार्यान्वित समाधान ने समस्या का प्रभावी ढंग से समाधान किया है।
  • उदाहरण: इंटरैक्टिव शिक्षण विधियों और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं को लागू करने के बाद, नियमित रूप से मानकीकृत परीक्षणों और कक्षा अवलोकनों के माध्यम से छात्रों की प्रगति का आकलन करें। यदि गणित दक्षता स्कोर में महत्वपूर्ण सुधार होता है, तो समाधान को सफल माना जा सकता है।

निष्कर्ष: इन चरणों का व्यवस्थित रूप से पालन करने से केस अध्ययन के लिए एक व्यापक और रणनीतिक दृष्टिकोण सुनिश्चित होता है। मामले को समझकर, एक केंद्रित समस्या का चयन करके, उसके कारणों की पहचान करके, समाधानों पर विचार-मंथन करके, सर्वश्रेष्ठ का चयन करके और परिणामों का मूल्यांकन करके, शोधकर्ता और चिकित्सक वास्तविक दुनिया की समस्याओं को प्रभावी ढंग से संबोधित करने के लिए सूचित रणनीति विकसित कर सकते हैं। यह संरचित प्रक्रिया निर्णय लेने को बढ़ाती है, आलोचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करती है और अध्ययन और अभ्यास के विभिन्न क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित समाधानों को बढ़ावा देती है।

केस स्टडी का उद्देश्य

(purpose of the case study).

व्यवहार विश्लेषण और परामर्श के संदर्भ में एक केस अध्ययन का उद्देश्य विशिष्ट व्यक्तियों या स्थितियों की विस्तृत जांच प्रदान करना है, जिसका उद्देश्य व्यवहार संबंधी समस्याओं का सटीक निदान करना और प्रभावी मार्गदर्शन और परामर्श प्रदान करना है। प्रत्येक मामले की अनूठी परिस्थितियों में गहराई से जाकर, पेशेवर लक्षित हस्तक्षेप विकसित कर सकते हैं, व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं और इसमें शामिल व्यक्तियों की समग्र भलाई को बढ़ा सकते हैं।

1. व्यवहार संबंधी समस्याओं का निदान और उपचार (Diagnosing and Treating Behavioral Problems):

  • उद्देश्य: व्यवहार संबंधी मामले के अध्ययन का एक प्राथमिक उद्देश्य व्यक्तियों में अंतर्निहित व्यवहार संबंधी समस्याओं का निदान करना है। विस्तृत विश्लेषण के माध्यम से, पेशेवर समस्याग्रस्त व्यवहार के पैटर्न, ट्रिगर और संभावित कारणों की पहचान कर सकते हैं।
  • उदाहरण: एक ऐसे बच्चे के मामले के अध्ययन पर विचार करें जो स्कूल में आक्रामक व्यवहार प्रदर्शित करता है। बच्चे की बातचीत, पारिवारिक गतिशीलता और स्कूल के माहौल का विश्लेषण करके, एक मनोवैज्ञानिक अंतर्निहित कारणों का निदान कर सकता है, जैसे कि बदमाशी के अनुभव या अनसुलझे भावनात्मक मुद्दे, और एक अनुरूप हस्तक्षेप योजना विकसित कर सकता है।

2. बेहतर मार्गदर्शन और परामर्श प्रदान करना (Providing Better Guidance and Counseling):

  • उद्देश्य: केस अध्ययन व्यक्तिगत मार्गदर्शन और परामर्श प्रदान करने के लिए एक आधार के रूप में कार्य करता है। किसी व्यक्ति के सामने आने वाली अनोखी चुनौतियों को समझकर, परामर्शदाता व्यक्ति की आवश्यकताओं के अनुरूप विशिष्ट सलाह, मुकाबला करने की रणनीतियाँ और समर्थन तंत्र प्रदान कर सकते हैं।
  • उदाहरण: एक केस स्टडी की कल्पना करें जिसमें एक किशोर शैक्षणिक तनाव और आत्मसम्मान के मुद्दों से जूझ रहा हो। निष्कर्षों के आधार पर, एक परामर्शदाता किशोरों की चिंताओं को प्रभावी ढंग से संबोधित करने के लिए तनाव प्रबंधन तकनीकों, आत्मविश्वास निर्माण अभ्यास और शैक्षणिक सहायता सहित लक्षित मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है।

निष्कर्ष: व्यवहार विश्लेषण और परामर्श में केस अध्ययन का उद्देश्य अंतर्निहित मुद्दों का निदान करना और अनुकूलित मार्गदर्शन और समर्थन प्रदान करना है। व्यक्तिगत मामलों पर ध्यान केंद्रित करके, पेशेवर व्यवहार संबंधी समस्याओं की सूक्ष्म समझ हासिल कर सकते हैं, जिससे वे सटीक हस्तक्षेप लागू करने में सक्षम हो सकते हैं जो शामिल व्यक्तियों के जीवन की समग्र गुणवत्ता को बढ़ाते हैं। ये अध्ययन प्रत्येक व्यक्ति की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप साक्ष्य-आधारित समाधान पेश करके मानसिक और भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Also Read:  B.Ed COMPLETE Project File IN HINDI FREE DOWNLOAD

केस स्टडीज की विशेषताएं

(characteristics of case studies).

केस स्टडीज़ एक शोध पद्धति है जो उनकी गहराई और किसी विशेष व्यक्ति, इकाई या संस्थान के अध्ययन पर ध्यान केंद्रित करने की विशेषता है। जांच के तहत विषय की व्यापक समझ हासिल करने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ शिक्षा, व्यवसाय, कानून और चिकित्सा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में इनका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। निम्नलिखित विशेषताएँ केस अध्ययन की प्रकृति को परिभाषित करने में मदद करती हैं:

1. किसी व्यक्ति या संस्था का गहन अध्ययन (In-Depth Study of a Person or Institution):

  • विशेषताएँ: केस अध्ययन में किसी विशिष्ट व्यक्ति, संगठन या संस्था की विस्तृत और गहन जाँच शामिल होती है। यह व्यापक दृष्टिकोण शोधकर्ताओं को विषय के विभिन्न पहलुओं का पता लगाने की अनुमति देता है।
  • उदाहरण: चिकित्सा के क्षेत्र में, एक केस स्टडी में एक दुर्लभ चिकित्सा स्थिति को समझने के लिए रोगी के चिकित्सा इतिहास, लक्षण, उपचार और परिणामों की गहन जांच शामिल हो सकती है।

2. अध्ययन के माध्यम से सूचना संग्रहण (Information Collection through Study):

  • विशेषताएँ: विषय का गहनता से अध्ययन करके डेटा एकत्र किया जाता है। शोधकर्ता प्रासंगिक जानकारी इकट्ठा करने के लिए साक्षात्कार, अवलोकन, सर्वेक्षण और दस्तावेज़ विश्लेषण जैसे विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।
  • उदाहरण: व्यावसायिक संदर्भ में, एक केस अध्ययन में प्रमुख हितधारकों का साक्षात्कार लेना, वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण करना और कंपनी की सफलता या विफलता में योगदान देने वाले कारकों का आकलन करने के लिए व्यावसायिक संचालन का अवलोकन करना शामिल हो सकता है।

3. अनेक क्षेत्रों में प्रयोज्यता (Applicability Across Multiple Fields):

  • विशेषताएँ: केस अध्ययन बहुमुखी हैं और शिक्षा, व्यवसाय, कानून, चिकित्सा और अन्य सहित विभिन्न विषयों में आयोजित किए जा सकते हैं। यह विधि विभिन्न शोध प्रश्नों और उद्देश्यों के अनुकूल है।
  • उदाहरण: शिक्षा के क्षेत्र में, एक केस स्टडी का उपयोग एक नई शिक्षण पद्धति की प्रभावशीलता का पता लगाने के लिए किया जा सकता है, जबकि कानून में, इसे एक हाई-प्रोफाइल अदालती मामले में उपयोग की जाने वाली कानूनी रणनीतियों का विश्लेषण करने के लिए नियोजित किया जा सकता है।

4. व्यक्ति या इकाई पर ध्यान दें (Focus on the Individual or Entity):

  • विशेषताएँ: केस अध्ययन एक केंद्रीय विषय के इर्द-गिर्द घूमते हैं, चाहे वह कोई व्यक्ति, संस्था या विशिष्ट मुद्दा हो। संपूर्ण शोध प्रक्रिया के दौरान यह विषय अध्ययन के केंद्र में रहता है।
  • उदाहरण: शैक्षिक अनुसंधान के संदर्भ में, यदि कोई छात्र एक ही कक्षा में लगातार असफल होता है, तो व्यक्तिगत छात्र केस स्टडी का केंद्र बिंदु बन जाता है।

5. विस्तृत जांच और डेटा विश्लेषण (Detailed Investigation and Data Analysis):

  • विशेषताएँ: केस अध्ययन में सावधानीपूर्वक जांच और डेटा संग्रह शामिल होता है। शोधकर्ता विषय वस्तु में गहराई से उतरते हैं, डेटा का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करते हैं, और अंतर्निहित कारणों और कारकों को उजागर करने का प्रयास करते हैं।
  • उदाहरण: संघर्षरत छात्र के मामले में, शोधकर्ता छात्र, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ साक्षात्कार आयोजित कर सकते हैं, पिछले शैक्षणिक रिकॉर्ड का विश्लेषण कर सकते हैं और आवर्ती विफलताओं के कारणों का पता लगाने के लिए कक्षा की बातचीत का निरीक्षण कर सकते हैं।

निष्कर्ष: केस अध्ययन की विशेषताएं, जिसमें उनकी गहन प्रकृति, सूचना एकत्र करने का दृष्टिकोण, अंतर-विषयक प्रयोज्यता, विषय-केंद्रित पद्धति और कठोर जांच शामिल है, उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में एक मूल्यवान अनुसंधान उपकरण बनाती है। केस अध्ययन जटिल वास्तविक दुनिया के परिदृश्यों में अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं और विशिष्ट मुद्दों की गहरी समझ प्रदान करते हैं, अंततः साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने और समस्या-समाधान में योगदान करते हैं।

बाल व्यवहार के अध्ययन में केस स्टडी के लाभ

(advantages of case study in studying child behavior).

केस अध्ययन एक मूल्यवान शोध पद्धति है, खासकर जब बच्चों जैसे जटिल व्यवहारों का अध्ययन किया जाता है। यह दृष्टिकोण बच्चे के प्राकृतिक वातावरण के भीतर उसके व्यवहार की गहराई से खोज करने की अनुमति देता है, जिससे उनके कार्यों, प्रतिक्रियाओं और बातचीत की व्यापक समझ बनती है।

1. बाल व्यवहार का विस्तृत अध्ययन (Detailed Study of Child Behavior):

  • लाभ: केस अध्ययन शोधकर्ताओं को उनके विशिष्ट वातावरण में बच्चे के व्यवहार के हर पहलू का अध्ययन करने में सक्षम बनाता है, और उन बारीकियों को पकड़ता है जो व्यापक अनुसंधान विधियों में छूट सकती हैं।
  • उदाहरण: स्कूल और घर पर साथियों, शिक्षकों और परिवार के सदस्यों के साथ एक बच्चे की बातचीत का अवलोकन और दस्तावेजीकरण करना, उनके सामाजिक व्यवहार का एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करना।

2. बाल व्यवहार और उसके कारणों को समझना (Understanding Child Behavior and Its Reasons):

  • लाभ: केस अध्ययन से शोधकर्ताओं को बच्चे के व्यवहार के पीछे के कारणों का पता लगाने में मदद मिलती है। यह गहरी समझ ट्रिगर्स, प्रेरणाओं और अंतर्निहित कारणों की पहचान करने में मदद करती है, जिससे अधिक सूचित हस्तक्षेप होता है।
  • उदाहरण: ऐसे मामले का पता लगाना जहां एक बच्चा आक्रामक व्यवहार प्रदर्शित करता है; विस्तृत विश्लेषण से पता चल सकता है कि यह व्यवहार पिछले आघात या अनसुलझे भावनात्मक मुद्दों से उत्पन्न होता है।

3. समस्याग्रस्त और कुसमायोजित बच्चों का अध्ययन  (Studying Problematic and Maladjusted Children):

  • लाभ: समस्याग्रस्त या कुसमायोजित बच्चों से निपटने के दौरान केस अध्ययन विशेष रूप से उपयोगी होते हैं। व्यक्तिगत मामलों पर ध्यान केंद्रित करके, पेशेवर बच्चे की विशिष्ट आवश्यकताओं को संबोधित करते हुए, अनुरूप सहायता और समर्थन प्रदान कर सकते हैं।
  • उदाहरण: स्कूल से इनकार करने वाले व्यवहार वाले बच्चे का अध्ययन करना; एक केस अध्ययन के माध्यम से, शिक्षक और मनोवैज्ञानिक सामाजिक चिंता या बदमाशी जैसे मूल कारणों की पहचान कर सकते हैं, और बच्चे को स्कूल के माहौल में समायोजित करने में मदद करने के लिए रणनीतियों को लागू कर सकते हैं।

4. सावधानीपूर्वक तैयारी के कारण विश्वसनीयता (Reliability Due to Careful Preparation):

  • लाभ: केस अध्ययन में सावधानीपूर्वक तैयारी शामिल होती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि डेटा संग्रह और विश्लेषण सटीक और विश्वसनीय हैं। यह सावधानीपूर्वक दृष्टिकोण अध्ययन के परिणामों की विश्वसनीयता को बढ़ाता है।
  • उदाहरण: शिक्षकों, अभिभावकों और बच्चे के साथ साक्षात्कार आयोजित करने के साथ-साथ कक्षा के व्यवहार का अवलोकन करना और शैक्षणिक रिकॉर्ड का विश्लेषण करना, एक व्यापक और विश्वसनीय केस अध्ययन परिणाम सुनिश्चित करता है।

निष्कर्ष: बच्चे के व्यवहार का अध्ययन करने में केस स्टडी के फायदे महत्वपूर्ण हैं, जो बच्चे के कार्यों और प्रेरणाओं की गहरी समझ प्रदान करते हैं। व्यक्तिगत मामलों पर ध्यान केंद्रित करके, शोधकर्ता और चिकित्सक लक्षित सहायता प्रदान कर सकते हैं, जिससे व्यवहार संबंधी चुनौतियों का सामना करने वाले बच्चों के लिए अधिक प्रभावी हस्तक्षेप और बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। मामले के अध्ययन में शामिल सावधानीपूर्वक तैयारी और विस्तृत विश्लेषण उनकी विश्वसनीयता में योगदान देता है और उन्हें बाल व्यवहार को समझने और संबोधित करने में अमूल्य उपकरण बनाता है।

Also Read: Complete UPSC PPT Study Material

Table: Perspectives on Individual Study: Definition by Prominent Social Scientists

(व्यक्तिगत अध्ययन पर परिप्रेक्ष्य: प्रमुख सामाजिक वैज्ञानिकों द्वारा परिभाषा).

Definition Author Explanation
“A detailed study of a social unit – whether that unit is an individual, a group, a social institution, a district or a community, a detailed study is called individual study.” P.V. Young पी.वी. यंग व्यक्तिगत अध्ययन को किसी भी सामाजिक इकाई की विस्तृत परीक्षा के रूप में परिभाषित करता है, चाहे वह व्यक्ति, समूह, संस्था या समुदाय हो। यह परिभाषा अध्ययन की व्यापक प्रकृति पर प्रकाश डालती है, विभिन्न सामाजिक इकाइयों को समझने में शामिल विश्लेषण की गहराई पर जोर देती है।
“The personal study method is a form of qualitative analysis under which a very careful and complete observation of a person, situation or organization is made.” B. Seng and B. Seng बी. सेंग और बी. सेंग व्यक्तिगत अध्ययन को एक गुणात्मक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के रूप में वर्णित करते हैं, जो व्यक्तियों, स्थितियों या संगठनों के सावधानीपूर्वक और गहन अवलोकन पर ध्यान केंद्रित करता है। यह परिभाषा सामाजिक घटनाओं को समझने में इसके गुणात्मक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए, अवलोकन प्रक्रिया की सावधानीपूर्वक और व्यापक प्रकृति पर जोर देती है।
“Individual study is a method by which every individual factor, whether it is an organization or a total event in the life of an individual or group, is analyzed in the context of some other unit of that group.” Howard Odom and Katherine Zocher हॉवर्ड ओडोम और कैथरीन ज़ोचर व्यक्तिगत अध्ययन को एक विश्लेषणात्मक पद्धति के रूप में परिभाषित करते हैं जहां किसी संगठन के भीतर या किसी व्यक्ति या समूह के जीवन के व्यक्तिगत कारकों की उस समूह के भीतर अन्य इकाइयों से संबंधित जांच की जाती है। यह परिभाषा व्यापक सामाजिक संदर्भ में व्यक्तिगत तत्वों के प्रासंगिक विश्लेषण को रेखांकित करती है, जो समग्र परिप्रेक्ष्य प्रदान करती है।
“Personal study method can be defined as a small, complete and in-depth study, under which the researcher uses all his abilities and methods to systematically collect sufficient information about a person so that it can ‘To know how a man and a woman function as a unit of society.’” Sin Pao Yeung सिन पाओ युंग व्यक्तिगत अध्ययन को एक केंद्रित, विस्तृत और व्यापक शोध दृष्टिकोण के रूप में चित्रित करते हैं। इसमें किसी व्यक्ति के बारे में व्यवस्थित रूप से पर्याप्त जानकारी इकट्ठा करने के लिए विभिन्न शोध कौशल का उपयोग करना शामिल है, जिससे समाज के भीतर उनकी भूमिका को समझने में मदद मिलती है। यह परिभाषा अध्ययन की गहन प्रकृति पर प्रकाश डालती है, जिसका उद्देश्य व्यक्तियों की सामाजिक कार्यप्रणाली को समझना है।

स्पष्टीकरण:

  • तालिका विभिन्न सामाजिक वैज्ञानिकों द्वारा प्रदान की गई व्यक्तिगत अध्ययन की विविध परिभाषाएँ प्रस्तुत करती है। प्रत्येक परिभाषा सामाजिक अनुसंधान में व्यक्तिगत अध्ययन की गहराई, दायरे और उद्देश्य पर एक अद्वितीय परिप्रेक्ष्य प्रदान करती है।
  • पी.वी. यंग व्यक्तिगत अध्ययन की व्यापक प्रकृति पर जोर देते हैं, विभिन्न सामाजिक इकाइयों पर इसकी प्रयोज्यता को रेखांकित करते हैं।
  • बी. सेंग और बी. सेंग गुणात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं, इस पद्धति के अभिन्न अंग सावधानीपूर्वक अवलोकन पर प्रकाश डालते हैं।
  • हॉवर्ड ओडोम और कैथरीन ज़ोचर प्रासंगिक विश्लेषण पर जोर देते हैं, एक व्यापक सामाजिक ढांचे के भीतर व्यक्तिगत तत्वों की जांच पर जोर देते हैं।
  • सिन पाओ युंग व्यक्तिगत अध्ययन की गहन, व्यवस्थित प्रकृति पर जोर देते हैं, जिसका लक्ष्य समाज के भीतर व्यक्तियों की भूमिकाओं को समझना है।
  • ये विविध परिभाषाएँ सामूहिक रूप से सामाजिक अनुसंधान में व्यक्तिगत अध्ययन पद्धति की समग्र समझ में योगदान करती हैं।

Table: Pros and Cons of the Case Study Method

(केस स्टडी पद्धति के फायदे और नुकसान).

यहां केस स्टडी पद्धति के गुण और दोषों का सारांश देने वाली एक तालिका है:

Merits of Case Study Method Demerits of Case Study Method
किसी सामाजिक इकाई की विस्तृत जांच की अनुमति देता है। सिद्धांत विकास के लिए अपर्याप्त एवं अवैज्ञानिक माना जाता है।
चयनित इकाई के अतीत, वर्तमान और भविष्य को समझने में सक्षम बनाता है। शोधकर्ता की व्यक्तिपरकता के कारण निष्कर्ष पक्षपातपूर्ण हो सकते हैं।
भविष्य के अनुसंधान के लिए व्यवस्थित परिकल्पनाओं के निर्माण की सुविधा प्रदान करता है। प्राप्त तथ्यों की विश्वसनीयता को हमेशा सत्यापित नहीं किया जा सकता है।
प्रश्नावली या साक्षात्कार जैसे अनुसंधान उपकरणों को बढ़ाने के अवसर प्रदान करता है। अन्य तरीकों की तुलना में अधिक समय और संसाधनों की आवश्यकता होती है।
विभिन्न इकाइयों के लिए सर्वोत्तम नमूनाकरण विधियों को निर्धारित करने में सहायता करता है। निष्कर्ष कम संख्या में मामलों पर आधारित होते हैं, जो सामान्यीकरण को सीमित करते हैं।
विरोधाभासी या अप्रासंगिक प्रतीत होने वाली इकाइयों से महत्वपूर्ण तथ्य प्रकट करता है। इकाइयों को अक्सर व्यवस्थित तरीकों के बजाय जानबूझकर चुना जाता है।
विषय में शोधकर्ता की रुचि और ज्ञान को बढ़ाता है, विश्लेषण को बढ़ाता है। संभावित रूप से त्रुटिपूर्ण सरकारी और गैर-सरकारी जानकारी पर निर्भर करता है।
दृष्टिकोण और सामाजिक मूल्यों जैसे गुणात्मक पहलुओं का अध्ययन करने के लिए आदर्श।

विशिष्ट मामलों में विस्तृत अंतर्दृष्टि प्रदान करने में केस अध्ययन पद्धति की अपनी ताकत है, लेकिन इसमें सीमाएं भी हैं, विशेष रूप से सामान्यीकरण, पूर्वाग्रह और बाहरी डेटा पर निर्भरता के संदर्भ में। शोधकर्ता अक्सर इसकी सीमाओं को संतुलित करने के लिए अन्य शोध विधियों के साथ इसका उपयोग करते हैं।

  • सामाजिक शोध में केस स्टडी पद्धति विद्वानों के बीच व्यापक बहस का विषय रही है। कुछ आलोचकों का तर्क है कि व्यक्तिगत डेटा, विशेष रूप से जीवन इतिहास, का मात्रात्मक विश्लेषण नहीं किया जा सकता है, जिससे सांख्यिकीय प्रक्रियाओं के बिना यह विधि अव्यावहारिक और अवैज्ञानिक लगती है। हालाँकि, विधि के समर्थकों का तर्क है कि यदि किसी विशिष्ट समूह के प्रतिनिधियों के रूप में चुने गए व्यक्ति ठोस जीवन अनुभव प्रदान कर सकते हैं, तो उनका डेटा उसी समूह के अन्य लोगों पर लागू किया जा सकता है। सांख्यिकीय परीक्षणों की अनुपस्थिति में, केस स्टडी पद्धति को गहन गुणात्मक विश्लेषण के लिए एक मूल्यवान उपकरण बनाने के लिए शोधकर्ताओं को अपने अच्छी तरह से प्रशिक्षित अनुभव, अंतर्दृष्टि और निर्णय पर भरोसा करना चाहिए। अपनी चुनौतियों के बावजूद, यह विधि सामाजिक अनुसंधान में जटिल मानवीय अनुभवों और व्यवहारों को समझने के लिए एक मूल्यवान दृष्टिकोण बनी हुई है।

Also Read: Psychology in English FREE PDF DOWNLOAD

शांति की जीत: ग्रामीण भारत में लचीलेपन और शिक्षा का एक केस स्टडी

(shanti’s triumph: a case study of resilience and education in rural india).

ग्रामीण भारत की हरी-भरी हरियाली के बीच बसे एक सुदूर गाँव में, शैक्षिक परिवर्तन की एक उल्लेखनीय कहानी मौजूद है। सुंदरपुर नाम के इस गांव को गरीबी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक सीमित पहुंच और लैंगिक असमानता सहित कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हालाँकि, युवा लड़कियों को सशक्त बनाने, सामाजिक मानदंडों को तोड़ने और सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक अभिनव शैक्षिक पहल के कारण समुदाय बदलाव के कगार पर था।

केस स्टडी उद्देश्य:

  • सुंदरपुर में शैक्षिक सशक्तिकरण कार्यक्रम के परिवर्तनकारी प्रभाव का पता लगाने के लिए, एक वंचित पृष्ठभूमि की युवा लड़की शांति के जीवन और शैक्षणिक सफलता और सशक्तिकरण की दिशा में उसकी यात्रा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  • केस स्टडी सुंदरपुर की एक दृढ़निश्चयी और उज्ज्वल युवा लड़की शांति के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसने अपने समुदाय को बांधने वाली निरक्षरता की जंजीरों से मुक्त होने का सपना देखा था। स्थानीय गैर सरकारी संगठनों और उत्साही शिक्षकों द्वारा समर्थित एक शैक्षिक सशक्तिकरण कार्यक्रम के कार्यान्वयन के साथ, सुंदरपुर की युवा लड़कियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, परामर्श और व्यावसायिक प्रशिक्षण के अवसर प्रदान किए गए।

अनुसंधान प्रश्न:

  • शैक्षिक सशक्तिकरण कार्यक्रम ने शांति के शैक्षणिक प्रदर्शन, आत्मविश्वास और आकांक्षाओं को कैसे प्रभावित किया?
  • शांति की शैक्षिक यात्रा में मार्गदर्शन और सामुदायिक समर्थन ने क्या भूमिका निभाई?
  • कार्यक्रम ने गांव के भीतर सामाजिक मानदंडों और लैंगिक असमानताओं को कैसे संबोधित किया?
  • शांति को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा और सहायता कार्यक्रमों ने इन बाधाओं पर काबू पाने में उसकी कैसे सहायता की?
  • गहन साक्षात्कार: शांति, उसके माता-पिता, शिक्षकों और कार्यक्रम समन्वयकों के साथ उसके अनुभवों और कार्यक्रम के प्रभाव के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए साक्षात्कार आयोजित करें।
  • फ़ील्ड अवलोकन: कार्यक्रम के कार्यान्वयन और उसके प्रभावों को समझने के लिए कक्षाओं, परामर्श सत्रों और सामुदायिक बातचीत का निरीक्षण करने के लिए सुंदरपुर का दौरा करें।
  • दस्तावेज़ विश्लेषण: शांति की प्रगति और परिवर्तन को मापने के लिए उसके अकादमिक रिकॉर्ड, उपस्थिति रिपोर्ट और प्रशंसापत्र की समीक्षा करें।
  • फोकस समूह चर्चाएँ: गाँव पर कार्यक्रम के व्यापक प्रभाव का आकलन करने के लिए अन्य लड़कियों और समुदाय के सदस्यों के साथ चर्चाएँ आयोजित करें।
  • एक उत्साही युवा लड़की शांति को सुंदरपुर में ग्रामीण जीवन की कठोर वास्तविकताओं का सामना करना पड़ा। शैक्षिक सशक्तिकरण कार्यक्रम की शुरुआत के साथ, उन्हें चुनौतियों के बीच आशा की एक किरण दिखी। समर्पित शिक्षकों और गुरुओं के समर्थन से, शांति अकादमिक रूप से आगे बढ़ी। इंटरैक्टिव शिक्षण विधियों और पाठ्येतर गतिविधियों के माध्यम से, उन्होंने विज्ञान के प्रति अपने जुनून को खोजा और डॉक्टर बनने का सपना देखा, एक ऐसा पेशा जो कभी उनके गांव में लड़कियों के लिए अप्राप्य माना जाता था।
  • अपने परिवार द्वारा गले लगाए जाने और अपने गुरुओं द्वारा प्रोत्साहित किए जाने पर, शांति सामाजिक दबावों के बावजूद डटी रही। केस स्टडी पद्धति ने शोधकर्ताओं को उसकी यात्रा की परतों को खोलने की अनुमति दी, जिससे न केवल उसकी शैक्षणिक उपलब्धियों बल्कि उसके बढ़ते आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प पर भी प्रकाश पड़ा।

निष्कर्ष: शांति की कहानी शिक्षा और सामुदायिक समर्थन की परिवर्तनकारी शक्ति का एक प्रमाण है। केस स्टडी पद्धति के माध्यम से, शोधकर्ताओं ने प्रतिकूलता से सशक्तिकरण तक का मार्ग उजागर किया, यह दिखाते हुए कि कैसे समर्पित प्रयास और अनुरूप शैक्षिक पहल लैंगिक बाधाओं को तोड़ सकते हैं, समुदायों का उत्थान कर सकते हैं और ग्रामीण भारत के दिल में आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित कर सकते हैं।

  • केस स्टडी पद्धति सामाजिक अनुसंधान के क्षेत्र में एक प्रकाशस्तंभ के रूप में खड़ी है, जो मानवीय अनुभवों की गहराई और विविधता को उजागर करती है। सिद्धांत और वास्तविक जीवन के अनुप्रयोग के बीच अंतर को पाटने की इसकी क्षमता इसे गहन अंतर्दृष्टि चाहने वाले शोधकर्ताओं के लिए एक अनिवार्य उपकरण बनाती है। जैसे-जैसे हम मानव व्यवहार की जटिलताओं से निपटते हैं, केस स्टडी पद्धति एक मार्गदर्शक बनी रहती है, जो एक समय में एक कहानी के साथ हमारी सामाजिक दुनिया की जटिल टेपेस्ट्री को उजागर करती है।
  • ICT Techniques For Evaluation In Social Science in Hindi
  • What Is Continuous And Comprehensive Evaluation In Hindi?
  • What Is Achievement Test In Hindi? PDF
  • Diagnostic Testing And Remedial Measures In Hindi (PDF)

Download or Copy link

  • Print or Download (PDF)

Leave a Comment Cancel reply

Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.

Live Law Hindi

  • जानिए हमारा कानून
  • हिंदू विधि भाग 11 : जानिए पति पत्नी...

case study of child in hindi

अपना ई मेल एड्रेस नीचे दिए गए बॉक्स में दर्ज करें और हर सुबह अपने ई मेल पर पाएं डेली न्यूज़ ब्रीफिंग।

सीधे आपके मेल बॉक्स में अपना ई मेल एड्रेस सब्मिट करें, हिंदू विधि भाग 11 : जानिए पति पत्नी के बीच मुकदमेबाज़ी के दौरान बच्चों की अभिरक्षा (child custody) कैसे निर्धारित की जाती है, shadab salim.

2 Sep 2020 4:30 AM GMT

हिंदू विधि भाग 11 : जानिए पति पत्नी के बीच मुकदमेबाज़ी के दौरान बच्चों की अभिरक्षा (Child Custody) कैसे निर्धारित की जाती है

वैवाहिक बंधन आपसी सूझबूझ पर निर्भर करता है। जब किसी वैवाहिक बंधन में ऐसी आपसी सूझबूझ का अभाव होता है तथा वैचारिक मत मिल नहीं पाते हैं तब मतभेद का जन्म होता है। ऐसे मतभेद से पति पत्नी के बीच अलगाव का भी जन्म हो जाता है। इस अलगाव के परिणामस्वरूप पति-पत्नी न्यायालय की शरण लेते हैं तथा दांपत्य अधिकारों की प्रत्यास्थापन, न्यायिक पृथक्करण और तलाक के मुकदमों का जन्म होता है।

जब इस प्रकार की कार्यवाही अदालतों में चलती रहती है, उस समय विवाह से उत्पन्न होने वाली संतानों पर संकट आ जाता है। किसी भी बच्चे के हित के लिए उसके माता पिता पिता दोनों का होना नितांत आवश्यक होता है। किसी भी बच्चे का भविष्य उसके माता-पिता के आपसी संयोजन पर निर्भर करता है। माता-पिता का समन्वय ही किसी बच्चे का भविष्य निर्धारण करता है।

जब पति पत्नी के बीच कोई न्यायालयीन कार्यवाही लंबित रहती है। ऐसी परिस्थिति में बच्चे की संरक्षकता उसकी अभिरक्षा के प्रश्न उत्पन्न होते हैं। इस प्रकार की कार्यवाही के लंबित रहते हुए बच्चे की अभिरक्षा किसके पास होगी यह अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है।

हिंदू विवाह अधिनियम 1955 इस समस्या से निपटने हेतु अधिनियम के भीतर संपूर्ण व्यवस्था करता है। अधिनियम की धारा 26 संतान की अभिरक्षा से संबंधित धारा है। इस आलेख में हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 26 से संबंधित महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख किया जा रहा है।

बच्चों की अभिरक्षा (Child Custody) (धारा 26)

यह धारा वाद कालीन स्थिति में वाद के पक्षकार पति और पत्नी में उत्पन्न होने वाली संतानों की अभिरक्षा के संबंध में प्रावधान करती है। यह धारा यह प्रावधान करती है कि न्यायालय वैध एवं अवैध संतानों की अभिरक्षा भरण पोषण व शिक्षा के संबंध में जहां तक संभव हो सके उनकी इच्छानुसार प्रावधान करने के लिए अंतरिम आदेश पारित कर सकता है। जहां ऐसा प्रावधान या तो अंतरिम आदेश के द्वारा अथवा डिक्री में किया जाता है तो इस प्रकार के मामलों में डिक्री के उपरांत भी अभिरक्षा भरण पोषण व शिक्षा के संबंध में आवेदन दिया जा सकता है।

अरुण लता बनाम सिविल जज बुलंदशहर 197 (3) ए डब्ल्यू सी 2284 में स्पष्ट किया गया है कि अधिनियम की वर्तमान धारा की शक्तियों का प्रयोग डिक्री पारित होने के उपरांत मात्र उस दशा में किया जा सकता है जबकि ऐसा आदेश डिक्री के पूर्व अंतरिम आदेश के रूप में अथवा डिक्री में पारित किया गया हो।

धारा 26 के अनुसार न्यायालय अपनी शक्ति का प्रयोग उस समय ही करता है जिस समय वाद के पक्षकारों द्वारा कोई मुकदमेबाजी की जा रही होती है। हिंदू विवाह अधिनियम 1955 विवाह के पक्षकार पति पत्नी को ऐसे अनेक अधिकार देता है जिसके माध्यम से वह न्यायालय की शरण लेते हैं तथा दोनों के बीच मुकदमेबाजी का जन्म होता।

धारा 26 में प्रयोग किए गए शब्दों से स्पष्ट होता है कि न्यायालय कुछ शर्तों के अधीन ही अधिकारिकता का प्रयोग कर सकता है। उन शर्तों में सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि इस शक्ति का प्रयोग उस ही स्थिति में किया जा सकता है। जब विवाह के पक्षकार पति और पत्नी के बीच कोई वैवाहिक मुकदमेबाजी चल रही हो। वैवाहिक मुकदमेबाजी से आशय न्यायिक पृथक्करण, दांपत्य अधिकारों का प्रत्यास्थापन, शून्य विवाह और शून्यकरणीय विवाह तथा संबंध विच्छेद याचिका और पारस्परिक विवाह विच्छेद इस प्रकार की कोई मुकदमेंबाजी यदि पक्षकारों के बीच चल रही है। ऐसी परिस्थिति में न्यायालय को यह विवेक अधिकार के साथ शक्ति दी गई है कि वह परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विवाह के पक्षकारों से उत्पन्न हुई संतान की अभिरक्षा के हित में कोई निर्णय ले सकेगा।

इस धारा के अंतर्गत न्यायालय मामले के दौरान अंतरिम आदेश पारित कर सकता है। यह डिक्री पारित करते समय या डिक्री पारित करने के बाद भी कर सकता है। बच्चों के वयस्क होने तक ही इस धारा के अंतर्गत आदेश प्रभाव में रहता है। हिंदू अप्राप्तव्यता और संरक्षता अधिनियम 1956 की धारा 6 के अनुसार 5 वर्ष तक के बच्चे को साधारणता माता की अभिरक्षा में ही रखा जाता है।

हिंदू विवाह अधिनियम 1956 की धारा 26 के अंतर्गत कोई भी स्वतंत्र कार्यवाही नहीं की जा सकती है। इस धारा के अधीन न्यायालय आदेश जब ही पारित कर सकता है, जबकि अन्य वैवाहिक उपचार पीड़ित पक्षकार द्वारा वाद योजित किया गया हो। इस धारा के अधीन किसी व्यक्ति को न्यायालय के सम्मुख स्वतंत्र रूप से अवयस्क की अभिरक्षा भरण पोषण अथवा उसके शिक्षा संबंधी व्यय के लिए प्रार्थना पत्र देने का अधिकार नहीं देता है। यह धारा वर्तमान अधिनियम के अंतर्गत मुकदमेबाजी कर रहे पक्षकारों को ही मात्र लंबित कार्यवाही में प्रार्थना पत्र देने का अधिकार प्रदान करती है।

सरदार भूपेंद्र सिंह बनाम श्रीमती जसवीर कौर एआईआर 2000 मध्य प्रदेश 330 के प्रकरण में पति ने विवाह विच्छेद का आवेदन प्रस्तुत किया था। उसकी एक पुत्री उत्पन्न हुई थी जो पत्नी के मायके में रहती थी तथा दोनों पुत्र पढ़ रहे थे। बालकों का प्राकृतिक संरक्षक पिता है। पति से पत्नी की आय कम है इस कारण पत्नी का अभिरक्षा प्राप्त करने का दावा अस्वीकार नहीं किया जा सकता। दोनों पुत्र पिता के साथ नहीं रहते थे और बाहर पढ़ते थे ऐसी स्थिति में दोनों पुत्रों को माता की अभिरक्षा में दिया गया क्योंकि पिता को देखभाल करने का समय नहीं था।

श्रीमती चंद्रप्रभा बनाम प्रेमनाथ कपूर एआईआर 1969 दिल्ली 283 के प्रकरण में न्यायिक पृथक्करण की कार्यवाही के दौरान पत्नी ने 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को अभिरक्षा में प्राप्त करने का आवेदन किया। आवेदन हिंदू अपर्याप्तव्यता और संरक्षकता अधिनियम 1956 के प्रावधानों के अनुसार वितरित करके निर्णीत किया जाएगा तथा 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे की अभिरक्षा की अधिकारी माता है। यदि बच्चे के लिए आवश्यक हो तभी अभिरक्षा को परिवर्तित किया जाना चाहिए।

अमिता शर्मा बनाम राजेंद्र जैन 1996 के प्रकरण में यह मत व्यक्त किया गया कि न्यायालय को बच्चों की अभिरक्षा अनिष्ट करने की व्यापक शक्तियां है। इस प्रयोजन के लिए आवेदन अधिनियम की कार्यवाही के अधीन करना चाहिए और यह अवयस्क व्यक्तियों के संबंध में ही होना चाहिए। किसी भी वयस्क व्यक्ति को यह अधिकार है कि यदि उसने वयस्कता प्राप्त कर ली है तो वह जिसके पास जाए जहां उसकी इच्छा हो वे जाकर रहे, यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार है जो किसी भी व्यक्ति को प्राण और दैहिक स्वतंत्रता प्रदान करता है।

हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 26 के अनुसार यह धारा धर्मज और अधर्मज दोनों प्रकार के पुत्र को और पुत्रियों के संबंध में प्रावधान करती है। इस धारा के अंतर्गत धर्मज और अधर्मज संतानों के बीच में कोई भी विभेद नहीं किया गया है। अधर्मज और धर्मज संतान क्या होती है इस संबंध में लेखक द्वारा पूर्व में लेख लिखा जा चुका।

सुरेंद्र कौर बनाम हरबक्श सिंह एआईआर 1984 सुप्रीम कोर्ट 1224 के प्रकरण में उच्चतम न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया है कि जहां एक बालक को उसके माता-पिता की अभिरक्षा से अपहरण किया जाता है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के अधीन बंदी प्रत्यक्षीकरण कि रिट याचिका को दायर किया जाता है तब बालक की अभिरक्षा का प्रश्न विधि सम्मत अधिकारों के पीछे छूट जाता है और बालक का हित और कल्याण उससे संबंधित आदेशों को पारित करने में एकमात्र कसौटी होना चाहिए।

हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 26 के अनुसार यदि किसी बालक की अभिरक्षा का प्रश्न उठता है तो ऐसी अभिरक्षा माता या पिता में से किसी को सौंपते हुए न्यायालय बालक की इच्छा को महत्वपूर्ण स्थान देता है। किसी भी बालक का हित उसके भविष्य के लिए सर्वोपरि होता है। न्यायालय कोई भी ऐसा निर्णय नहीं लेता है जो किसी बालक के भविष्य के लिए कष्टदायक सिद्ध हो। हिंदू अप्राप्तव्ययता और दत्तक ग्रहण अधिनियम के अनुसार किसी भी बालक को प्रारंभ 5 वर्ष की उम्र तक उसकी माता को ही सौंपा जाता है क्योंकि पिता भले ही नैसर्गिक संरक्षक हो परंतु किसी भी पालक के लिए उसकी माता का स्नेह है और प्रेम सर्वोपरि होता है। एक छोटे से अबोध बालक को उसकी माता से किसी भी सूरत में पृथक नहीं किया जा सकता।

हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 26 बालक की अभिरक्षा के साथ ऐसे बालक की भरण पोषण की व्यवस्था भी करता है। भरण पोषण की धनराशि की मात्रा माता-पिता की आर्थिक दशा और उनके आर्थिक स्तर और बालक की आवश्यकता पर निर्भर करती है।

हीरालाल बनाम श्रीमती रवि जैन 1991 मध्य प्रदेश के एक प्रकरण में धारा 26 के प्रावधान के अनुसार न्यायालय को समय-समय पर कोई भी अंतरिम आदेश पारित करने का अधिकार होता है। विवाह विच्छेद के लिए धारा 13 के अधीन पति द्वारा की गई कार्यवाही में पत्नी द्वारा धारा 26 के अधीन दायर आवेदन पत्र घोषणा भरण पोषण के लिए ₹100 प्रति माह स्वीकार किया। पुत्र के भरण-पोषण के लिए धारा 26 के आदेश नहीं दिया जा सकता था फिर भी धारा 26 के अधीन भरण पोषण की राशि का भुगतान करने का आदेश प्राप्त था।

रयूर वेंकट बनाम श्रीमती मेरुका कमलम्मा एआईआर 1982 आंध्र प्रदेश 369 में वर्तमान धारा का निर्वाचन करते हुए न्यायालय की शक्तियों को स्पष्ट करते हुए यह बताया गया है कि विवाह विच्छेद की डिक्री पारित करने के दौरान संबंधित न्यायालय धारा 26 के अधीन अवयस्क संतानों की शिक्षा के संबंध में उपबंध कर सकता है।

  • मुख्य सुर्खियां
  • साक्षात्कार

Advertise with us

Privacy policy, terms & conditions, --> advertise with us.

2024 © All Rights Reserved @LiveLaw

Powered By Hocalwire

sidekick

When you choose to publish with PLOS, your research makes an impact. Make your work accessible to all, without restrictions, and accelerate scientific discovery with options like preprints and published peer review that make your work more Open.

  • PLOS Biology
  • PLOS Climate
  • PLOS Complex Systems
  • PLOS Computational Biology
  • PLOS Digital Health
  • PLOS Genetics
  • PLOS Global Public Health
  • PLOS Medicine
  • PLOS Mental Health
  • PLOS Neglected Tropical Diseases
  • PLOS Pathogens
  • PLOS Sustainability and Transformation
  • PLOS Collections
  • About This Blog
  • Author Guidelines
  • Official PLOS Blog
  • EveryONE Blog
  • Speaking of Medicine
  • PLOS Biologue
  • Absolutely Maybe
  • DNA Science
  • PLOS ECR Community
  • All Models Are Wrong
  • About PLOS Blogs

PLOS Mental Health Community Case Studies: Confronting the Mental Health Consequences of Child Marriage

case study of child in hindi

Child marriage is rooted in gender inequality and disproportionately affects girls, compromising their rights to health, education, and economic opportunity. Child marriage is often discussed in terms of its physical and reproductive health consequences, but the devastating impact it has on mental health is less widely known. Each year, 12 million girls [1] worldwide are forced to marry before the age of 18 [2] , robbing them of their childhoods and putting their mental health at serious risk. A recent symposium brought together global experts to shine a light on this hidden crisis and identify the next steps to help affected communities.

The half-day symposium was hosted by the University College London (UCL)-led Global Network on Mental Health and Child Marriage , in collaboration with the Child Marriage Research to Action Network (CRANK), a joint initiative of Girls Not Brides: The Global Partnership to End Child Marriage and the United Nations Population Fund (UNFPA) – United Nations Children’s Fund (UNICEF) Global Programme to End Child Marriage. It brought together researchers, practitioners, policymakers, and donors to explore the existing evidence on the mental health consequences of child marriage and chart future action on what works to support ever married girls. Speakers at the hybrid event (in-person and on Zoom) shared research and real-life stories that highlight the high risk of depression, anxiety, self-harm, post-traumatic stress disorder (PTSD), and other mental health challenges that girls and women who marry young face.

“The mental health consequences of child marriage is an important topic area, and this is underscored by the massive interest it received from nearly 30 in-person attendees, over 200 active online participants, and 600 registered attendees who will be accessing the symposium recordings later,” said Dr. Rochelle Burgess, Network Director and Associate Professor at UCL, co-Editor in Chief of PLOS Mental Health .   ” Social factors driving child marriage have independent and interactive associations with negative mental health outcomes.”

case study of child in hindi

The key takeaways from the symposium were clear…

Barriers to Support: Mobility Restrictions and Mental Health Stigma

Child Marriage leads to a range of poor mental health outcomes for girls and women, yet, support services are limited and hard for these vulnerable populations to access .

Speakers emphasised that married girls often face tight restrictions on their mobility and autonomy, preventing them from seeking help independently. Additionally, deep-seated stigma around mental health issues in many communities means girls are reluctant to reach out, fearing judgement or shame.

“These girls are trapped – not only by the trauma of child marriage, but by societal barriers that keep them isolated and silent,” said Julius Ololade Baruwa , a public health researcher from the University of Cape Town.

The impact is devastating, and grows more severe the younger a girl is married. Sexual violence, unwanted pregnancy, divorce, and conflict can further compound mental health challenges for these girls. Researchers found that girls experiencing unwanted pregnancies are five times more likely to develop common mental health disorders. “We have to meet these girls where they are and empower them to access the care they so desperately need,” said Farirai Gumbonzvanda from the March-Zim project, Zimbabwe. One-stop centers for health, legal, psychosocial support and referrals may be effective – as ever-married girls’ mobility is often limited – but should be tailored to their needs.

These girls are trapped – not only by the trauma of child marriage, but by societal barriers that keep them isolated and silent Julius Ololade Baruwa, University of Cape Town

Context Matters – One size does not fit all!

The factors that drive child marriage are complex and context-dependent . Social norms, gender inequality, family poverty, and conflict all play a role. Efforts to address the mental health impacts must therefore be nuanced and responsive to individual circumstances, such as  age, marital status, type of marriage, family/partner income, and community context, including geographical location, social norms, gender inequality, and the effect of conflict or crisis. “Context is key when it comes to child marriage,” said Kimberly Howe from Tufts University. “We need to engage directly with girls, families, and local leaders to understand the unique challenges they face.”

One promising strategy highlighted at the symposium was the use of community conversations and arts-based approaches , such as radio dramas , to foster dialogue, create safe spaces for married girls, and deepen understanding of their experiences. By exploring how child marriage intersects with other socioeconomic issues and cultural norms, these platforms can help shift harmful mindsets.

Governments, donors, practitioners, and researchers were also urged to invest in mapping trends and responses across diverse contexts. Collecting comprehensive, disaggregated data – broken down by factors like age, marital status, and geographic location – will be crucial for designing tailored interventions.

Interventions can be therapeutic for participants.

Speakers stressed the need for mental health support to be embedded throughout research and programming on child marriage. This could include facilitating access to support through community-based services and engaging families and local leaders to build a more supportive ecosystem for girls. One study found that the mere exercise of conducting research, by virtue of simply asking girls about their mental health, could be a therapeutic opportunity.

Importantly, scaling up successful small-scale pilots will require engaging policymakers from the start and aligning with national-level priorities around girls’ education and health.

“We have to treat the whole person—mind and body,” said Nicola Jones of the Overseas Development Institute. “Only then can we truly help these girls heal and build the lives they deserve.”

The symposium closed with the following next steps:

-Researchers, particularly those based in low- and middle-income countries, should be supported to publish case studies that demonstrate what is working and what is not.

-A mapping exercise to document and synthesize relevant guidelines, curricula, and resources in child marriage and mental health should be undertaken.

-Practitioners and researchers need to collaborate with WHO, UNFPA, UNICEF and others to include attention to mental health in guidance and policies related to child marriage, as appropriate.

-It is important to continue to raise global awareness of the importance of mental health support for child marriage survivors. This can be done through regular convenings and conferences.

About the author

Dr. Olubukola Christianah Omobowale is a Senior Lecturer  and Honorary Consultant in the Department of Community Medicine, College of Medicine, University of Ibadan, Nigeria, and a Consultant Community Physician at the University College Hospital Ibadan, Nigeria. She obtained her medical degree (MBBS) from the University of Ibadan and later her Master of Public Health from the same institution, where she is also pursuing her Ph.D. She is a Fellow of the West African College of Physicians’ (WACP) Faculty of Community Health and a member of the National Postgraduate Medical College of Nigeria’s (NPMCN) Faculty of Public Health. Dr. Olubukola Omobowale is a global mental health researcher, community mental health advocate, and expert in women’s health.

case study of child in hindi

Dr. Omobowale’s research interests include the development and evaluation of community-based rehabilitation interventions for vulnerable groups (women, girls, children, the elderly, and those with mental health dconditions) within their communities as well as linking them with available community resources. She uses epidemiological models such as community participatory methods, coproduction, community resource mapping and community engagement to engender community health among vulnerable populations as she harnesses their lived experiences in designing these interventions.. Her two current projects are focused on providing Community Based Rehabilitation and Psychosocial Support Interventions for people living with mental health conditions in Sub-Saharan Africa ( SUCCEED Africa ) and the Ending Child Marriage in Nigeria through Community-led media series project ( ENCASE project ) Dr. Omobowale has presented her work at local and international conferences with articles published in peer reviewed journals. Dr. Omobowale is a member of several learned societies including the Global Network on Mental Health and Child Marriage, Child Marriage Research to Action Network (CRANK) as well as being a member of the Research Committee of the Consortium of Universities for Global Health. Dr. Omobowale sings alto at her local church choir in Ibadan, Nigeria and she enjoys spending time with her husband and beautiful children.

[1] UNICEF ,2023 https://childmarriagedata.org/

[2] Child, Early  Forced Marriages and  Unions   (CEFMU)

PLOS Mental Health considers submissions across the entire range of mental health-related disciplines and currently has 16 different sections. We’ll be sharing…

Our latest ‘Journeys in Mental Health’ blog honours World Refugee Day. PLOS Mental Health recently published an Opinion on the experience of…

Community Case Studies: The damaging effects on community mental health when unique services are lost PLOS Mental Health introduces ‘Community Case Studies&rsquo…

CASI Home

Search form

Natural disasters and child marriages: a case study from bihar.

case study of child in hindi

The past few months have been a time of great flux in India. While the economic slowdown and the COVID-19 crisis were the media’s central focus, two seemingly unrelated reports also appeared in this rapidly moving news cycle: a proposal to increase women’s legal age at marriage to 21 and floods in Eastern India. Although child marriage declined from 38.69 percent to 16.1 percent in the decade since the Child Marriage Act (2006) came into being, it is still a persistent phenomenon in Eastern India. Almost 30 percent of child marriages are accounted for by four states in this region (Bihar, Jharkhand, Odisha, and West Bengal). Evidently, legal restrictions on the minimum age at marriage have not effectively prevented young people from entering matrimony in this region. Simultaneously, flood-prone areas are increasingly expanding, and the frequency and magnitude of flash flooding events will likely increase in the coming years.

What are the reasons for the enduring nature of early marriage in this region? In our recent paper , we explore the link between early marriage and natural disasters and argue that natural disasters that cause economic destruction can increase child marriage prevalence. To unpack the causal relationship between natural disasters and early marriage, we focus on the 2008 Kosi floods in Bihar, which entailed a massive economic shock for the affected region.

On August 18, 2008, due to an embankment breach in the Kusaha village of Sunsari district in Nepal, the Kosi River burst into an old path it had abandoned two-hundred years before. As the river shifted 100 km from its older course, parts of Northern Bihar were entirely submerged. About 1,000 villages in Araria, Madhepura, Saharsa, Supaul, and Purnea were severely affected. As many as one million people were temporarily displaced, and an additional two million people were directly affected. The state government responded swiftly, though many households still had to make their own arrangements to move out of the flood-affected areas. Over 440,000 people lived in relief camps for four months before returning to their villages by December 2008. While the associated mortality was minimal (527 lives—0.005 percent of Bihar’s population), Kosi floods caused enormous economic losses. The estimated damage was INR 5,935 million ($134.9 million), which amounts to 0.5 percent of the Gross State Domestic Product in that year. Then-Prime Minister Manmohan Singh called this flooding event a “national calamity.”

To isolate the causal effect of the Kosi floods on the timing of marriage, we use the fourth round of the National Family Health Survey and exploit the spatial variation in the exposure to floods along with the temporal variation in the year of marriage in a difference-in-differences framework. This design calculates the impact of the floods on the timing of marriage by comparing the difference in child marriage rates across flood-affected and non-flood affected districts for those who married between 2001 and July 2008 (when neither group had been affected by the floods) with the difference in rates across flood-affected and non-flood affected districts for those who married between September 2008 and 2015 (when those living in flood-affected districts had experienced the economic shock). If one assumes that the timing of marriage across these two groups would not have changed in the absence of floods, the difference between the two differences—the difference-in-differences—provides the impact of the Kosi floods on the timing of marriage. The estimation sample comprises 18,797 women and 3,033 men, all of whom married between 2001 and 2016, about seven years before and after the flooding event (the fourth round of the National Family Health Survey interviewed only 15 percent of randomly chosen male spouses). Importantly, for the validity of the causal link between the Kosi floods and the timing of marriage, the affected region had not witnessed extreme flooding for several decades since the construction of an embankment on both sides of the Kosi River in the 1950s. Since Bihar experienced a normal monsoon season in 2008, the floods were completely unanticipated by the five affected districts’ residents.

Using this empirical approach, we show that the Kosi floods reduced both male and female ages at marriage, which translated into a 6.9 percentage point increase in male child marriage incidence and a 3.6 percentage point increase in female child marriage incidence. If we restrict our sample to 3,033 couples in the data, the incidence of female child marriage increases by 7.1 percentage points (p-value: 0.13), which is similar in magnitude to the increase in the incidence of male child marriage. We also find that this result is driven by marriages formed within 2.5 years of the flooding event. The effect of the floods on child marriage was stronger in districts that experienced greater destruction of property.

What explains this link between the Kosi floods and child marriage rates? In response to such economic shocks, households with young sons may marry their sons early to receive dowry and sustenance through tough times. This response is particularly likely if the family is already poor. Given that men typically marry younger women, more girls also marry at younger ages; male and female age at marriage decreases by ten months and 4.5 months, respectively. Of course, the reduction in age at marriage for men and women need not be equal. Since the decrease in age at marriage for women is lower than that for men, we should expect that the spousal age gap will reduce. While it does diminish, since we can estimate this effect only on the smaller sample where we have data for both men and women, this effect is not precisely estimated. Since the floods’ effect is larger among men, it is likely driven by a response by child grooms’ families.

In support of this explanation, we find that the effect of the Kosi floods was more pronounced among Hindu households, where dowry is predominant, and among landless families, who would have been the most affected. We also show that the floods did not differentially affect school infrastructure and enrollment, confirming that school dropouts did not drive this increase in child marriages. Moreover, we find no evidence of the Kosi floods changing sex-ratios, allowing us to discard an explanation that would rely on demographic changes driving our key results. While migration due to marriage happens within close distances, and typically within the same district , it is still possible that women in Kosi (non-Kosi) districts may be marrying men in bordering non-Kosi (Kosi) districts.

These results suggest that child marriage could be a critical coping mechanism in response to economic losses associated with natural disasters. By this logic, child marriage reduces welfare if parents, who are the decision-makers, do not consider their decision’s long-term consequences; the Kosi floods reduced secondary school completion rate among married men and women. We also document the adverse effects of the floods on women’s economic outcomes, where women were not only less likely to work, but also less likely to have their own money. These patterns supplement the vast literature that shows that early marriage diminishes different aspects of women’s well-being, such as education, health, labor force participation, and their children’s human capital. Therefore, while early marriage, in the face of an economic shock, may seem optimal from parents’ perspectives, it entails high long-term costs for the young couple, especially the bride.   

This study highlights the institution of marriage as a channel through which disasters may have a long-lasting impact on women. Thinking about policy responses that will decouple child marriage and natural disasters becomes especially critical today when Eastern India is experiencing more frequent flooding events. In addition, the loss of livelihood during the COVID-19 pandemic will push many young people into early marriage, especially in already poor households; reports already suggest child marriage incidence has increased in the past few months. From a policy perspective, it is critical to recognize that if disaster insurance or low-cost credit is readily available, the affected households will have ways—other than the dowry tradition—to plan recoveries after experiencing an economic shock, thereby weakening the link between natural disasters and child marriage.                   

Madhulika Khanna and Nishtha Kochhar are Ph.D. candidates in the Department of Economics at Georgetown University.  

India in Transition ( IiT ) is published by the Center for the Advanced Study of India (CASI) of the University of Pennsylvania. All viewpoints, positions, and conclusions expressed in IiT are solely those of the author(s) and not specifically those of CASI.

© 2020 Center for the Advanced Study of India and the Trustees of the University of Pennsylvania. All rights reserved.

Open Access is an initiative that aims to make scientific research freely available to all. To date our community has made over 100 million downloads. It’s based on principles of collaboration, unobstructed discovery, and, most importantly, scientific progression. As PhD students, we found it difficult to access the research we needed, so we decided to create a new Open Access publisher that levels the playing field for scientists across the world. How? By making research easy to access, and puts the academic needs of the researchers before the business interests of publishers.

We are a community of more than 103,000 authors and editors from 3,291 institutions spanning 160 countries, including Nobel Prize winners and some of the world’s most-cited researchers. Publishing on IntechOpen allows authors to earn citations and find new collaborators, meaning more people see your work not only from your own field of study, but from other related fields too.

Brief introduction to this section that descibes Open Access especially from an IntechOpen perspective

Want to get in touch? Contact our London head office or media team here

Our team is growing all the time, so we’re always on the lookout for smart people who want to help us reshape the world of scientific publishing.

Home > Books > Learning Disabilities - Neurological Bases, Clinical Features and Strategies of Intervention

The Child with Learning Difficulties and His Writing: A Study of Case

Submitted: 30 May 2019 Reviewed: 16 August 2019 Published: 20 November 2019

DOI: 10.5772/intechopen.89194

Cite this chapter

There are two ways to cite this chapter:

From the Edited Volume

Learning Disabilities - Neurological Bases, Clinical Features and Strategies of Intervention

Edited by Sandro Misciagna

To purchase hard copies of this book, please contact the representative in India: CBS Publishers & Distributors Pvt. Ltd. www.cbspd.com | [email protected]

Chapter metrics overview

1,193 Chapter Downloads

Impact of this chapter

Total Chapter Downloads on intechopen.com

IntechOpen

Total Chapter Views on intechopen.com

The purpose of this paper is to present one child with learning difficulties writing process in multigrade rural elementary school in México. It presents Alejandro’s case. This boy lives in a rural area. He shows special educational needs about learning. He never had specialized attention because he lives in a marginalized rural area. He was integrated into regular school, but he faced some learning difficulties. He was always considered as a student who did not learn. He has coursed 2 years of preschool and 1 year of elementary school. Therefore, this text describes how child writes a list of words with and without image as support. Analysis consists to identify the child’s conceptualizations about writing, his ways of approaching, and difficulties or mistakes he makes. The results show that Alejandro identifies letters and number by using pseudo-letters and conventional letter. These letters are in an unconventional position. There is no relationship grapheme and phoneme yet, and he uses different writing rules. We consider his mistakes as indicators of the learning process.

  • writing difficulties
  • learning difficulties
  • writing learning
  • writing process
  • special education

Author Information

Edgardo domitilo gerardo morales *.

  • Faculty of Philosophy and Letters, National Autonomous University of Mexico, México City, México

*Address all correspondence to: [email protected]

1. Introduction

One of the purposes of Mexican education system is that students acquire conventional writing during first grades in elementary school [ 1 ]. This purpose consists of students to understand the alphabetical code, its meaning, and functionality. In this way, they can integrate into a discursive community.

The elementary school teacher teaches a heterogeneous group of children [ 1 ,  2 ]. Some students show different acquisition levels of the writing. This is due to literacy environment that the family and society provide. Thus, some children have had great opportunities to interact with reading and writing practices than others. Therefore, some students do not learn the alphabetical principle of writing at the end of the scholar year. They show characteristics of initial or intermediate acquisition level of the writing. In this way, it is difficult for children to acquire writing at the same time, at the term indicated by educational system or teachers.

In addition, there may be children with learning difficulties in the classroom. Department of Special Education teaches some children. Students with special educational needs show more difficulties to learn than their classmates [ 3 ]. They require more resources to achieve the educational objectives. These authors point out that special educational needs are relative. These needs arise between students’ personal characteristics and their environment. Therefore, any child may have special educational needs, even if he/she does not have any physical disability. However, some students with learning difficulties do not have a complete assessment about their special educational needs. On the one hand, their school is far from urban areas; on the other hand, there are not enough teachers of special education for every school. In consequence, school teachers do not know their students’ educational needs and teach in the same way. Thereby, students with learning difficulties do not have the necessary support in the classroom.

Learning difficulties of writing may be identified easily. Children with special educational needs do not learn the alphabetical principle of writing easily; that is, they do not relate phoneme with grapheme. Therefore, children show their conceptualizations about writing in different ways. Sometimes, teachers censor their students’ written productions because they do not write in a conventional way. Children with special educational needs are stigmatized in the classroom. They are considered as less favored. At the end of the scholar year, children do not pass.

Therefore, the purpose of this paper is to present one child with special educational needs writing process in a Mexican multigrade rural school. This text describes how the child writes a list of words with and without image as support. Analysis consists to identify the child’s conceptualizations about writing [ 4 ], his ways of approaching, and difficulties or mistakes he makes. These mistakes are the indicators of learning process [ 5 ].

This paper presents Alejandro’s case. This boy lives in a rural area. He shows special educational needs about learning. He never had specialized attention because he lives in a marginalized rural area. He was integrated into regular school, but he faced some learning difficulties. He was always considered as a student who does not learn. Therefore, this text describes Alejandro’s writing, what he does after 2 years of preschool and 1 year of elementary school.

2. Children with learning difficulties and their diagnosis

According to the National Institute for the Evaluation of Education [ 6 ], Mexican education system provides basic education (preschool, elementary, and secondary school) for students with special educational needs. There are two types of special attention: Center of Multiple Attention (CAM, in Spanish) and Units of Service and Support to Regular Education (USAER, in Spanish). In the first one, children with special educational needs go to this Center. These children receive attention according to basic education and their educational needs. In the second, specialized teachers on special education go to school and provide support to students. These teachers provide information to school teachers too. In this way, there is educational equity and inclusion in Mexican school [ 7 ].

Physical appearance : Teacher describes the child’s physical characteristics. These features indicate the type of food the student eats, care his or her person, the parents’ attention, among other elements.

Behavior observed during the assessment : In this section, the teacher should record the conditions in which the assessment was carried out: child’s attitude, behavior, and interest.

Child’s development history : This section presents conditions in which pregnancy developed, physical development (ages in which child held his/her head, sat, crawled, walked, etc.), language development (verbal response to sounds and voices, age in which said his/her first words and phrases, etc.), family (characteristics of their family and social environment, frequent activities, etc.), hetero-family history (vision, hearing, etc.), medical history (health conditions, diseases, etc.), and scholar history (age at which he/she started school, type of school, difficulties, etc.).

Present condition : In this, there are four aspects:

It refers to student’s general aspects: intellectual area (information processing, attention, memory, understanding, etc.), motor development area (functional skills to move, take objects, position of his/her body, etc.), communicative-linguistic area (phonological, semantic, syntactic and pragmatic levels), adaptation and social interaction area (the child’s skills to initiate or maintain relationships with others), and emotional area (the way of perceiving the world and people). In each one, it mentions the instruments he suggests, although there is not enough information about them [ 3 ].

The second aspect is the curricular competence level. Teacher identifies what the student is capable of doing in relation to established purposes and contents by official curriculum.

The third aspect is about the learning style and motivation to learn. It presents physical-environmental conditions where the child works, their interests, level attention, strategies to solve a task, and the incentives he receives.

The fourth aspect is information about the student’s environment: factors of the school, family, and social context that influence the child’s learning.

Psycho-pedagogical assessment allows to identify children’s general educational needs. In this way, the school teacher could have information about the students’ difficulties. However, it is a general assessment. It contains several aspects and does not go deeper into one.

Therefore, this paper does not propose a new assessment. It consists of presenting one child’s writing difficulties, his ways of conceptualizing writing, and some mistakes he gets to make.

3. Students with learning difficulties and their scholar integration

Since 1993, Mexican system education has tried to offer special education services to students with special educational needs in basic education [ 8 ]. The first step was to promote the integration of these children in regular education classrooms. However, only insertion of the student in the school was achieved. Therefore, the system of education searched for mechanisms to provide advice to teacher. In this way, student with learning difficulties can be attended at the same time in the classroom [ 8 ].

Educational integration has been directly associated with attention of students with learning difficulties, with or without physical disabilities [ 8 ]. However, this process implies a change in the school. For this, it is necessary to provide information and to create awareness to the educational community, permanent updating of teachers, joint work between teacher, family, and specialized teachers.

At present, Mexican education system looks at educational integration as process in which every student with learning difficulties is supported individually [ 9 ]. Adapting the curriculum to the child is the purpose of educational integration.

Curricular adequacy is one of the actions to support students with learning difficulties [ 10 , 11 ]. This is an individualized curriculum proposal. Its purpose is to attend the students’ special educational needs [ 3 ]. At present, Mexican education system indicates that there should be a curricular flexibility to promote learning processes. However, it is important to consider what the child knows about particular knowledge.

Regarding the subject of the acquisition of written language, it is necessary to know how the children build their knowledge about written. It is not possible to make a curricular adequacy if teachers do not have enough information about their students. However, children are considered as knowledge builders. Therefore, there are learning difficulties at the process.

4. Alejandro’s case

This section presents Alejandro’s personal information. We met him when we visited to his school for other research purposes. We focused on him because the boy was silent in class. He was always in a corner of the work table and did not do the activities. For this, we talked with his teacher and his mother to know more about him.

Alejandro is a student of an elementary multigrade rural school. He was 7 years old at the time of the study. He was in the second grade of the elementary school. His school is located in the region of the “Great Mountains” of the state of Veracruz, Mexico. It is a rural area, marginalized. To get to this town from the municipal head, it is necessary to take a rural taxi for half an hour. Then, you have to walk on a dirt road for approximately 50 min.

Alejandro’s family is integrated by six people. He is the third of the four sons. He lives with his parents. His house is made of wood. His father works in the field: farming of corn, beans, and raising of sheep. His mother is a housewife and also works in the field. They have a low economic income. Therefore, they receive a scholarship. One of his older brothers also showed learning difficulties at school. His mother says both children have a learning problem. But, they do not have any money for attending their sons’ learning difficulties. In addition, there are no special institutes near their house.

The boy has always shown learning difficulties. He went to preschool for 2 years. However, he did not develop the necessary skills at this level. At classes, this child was silent, without speaking. Preschool teachers believed that he was mute. Nevertheless, at scholar recess, he talked with his classmates. Alejandro was slow to communicate with words in the classroom.

When he started elementary school, Alejandro continued to show learning difficulties. At classes, he was silent too. He just watched what his classmates did. He did not do anything in the class. He took his notebook out of his backpack and just made some lines. Occasionally, he talked with his classmates. When the teacher asked him something, Alejandro did not answer. He looked down and did not answer. He just ducked his head and stayed for several minutes.

When Alejandro was in second grade, he did different activities than his classmates. His teacher drew some drawings for him and he painted these drawings. Other occasions, the teacher wrote some letters for him to paint. The child did every exercise during several hours. He did not finish his exercises quickly. Sometimes he painted some drawings during 2 h.

Although Alejandro requires specialized attention, he has not received it. He has not had a full psycho-pedagogical assessment at school by specialized teachers. His school does not have these teachers. Also, the child was not submitted to neurological structural examination or neurophysiological studies to exclude an organic origin of his learning difficulties. His parents do not have enough financial resources to do this type of study for him. In addition, one specialized institution that can do this type of study for free is in Mexico City. It is so far from child’s house. It would be expensive for the child’s parents. Therefore, he is only attended as a regular school student.

For this reason, this paper is interested in the boy’s writing process. This is because Alejandro coursed 2 years of preschool and 1 year of elementary school; however, he does not show a conventional writing yet. In this way, it is interesting to analyze his conceptualizations about writing and difficulties he experiences.

5. Methodology

The purpose of this paper is to know the child’s ways to approach writing spontaneously and his knowledge about the writing system. For this, the author used a clinical interview. He took into account the research interview guide “Analysis of Disturbances in the Learning Process of Reading and Writing” [ 12 ].

The clinical interview was conducted individually. We explored four points, but we only present two in this text: to write words and to write for image.

Interviewer took the child to the library room at school. There were no other students. First, the interviewer gave the child a sheet and asked to write his name. Alejandro wrote his name during long time. Interviewer only asked what it says there. He answered his name: “Alejandro.” Next, the interviewer asked the child to write some letters and numbers he knew. Alejandro wrote them. The interviewer asked about every letter and number. The child answered “letter” or “number,” and its name.

To write words : The interviewer asked the child to write a group of words from the same semantic field in Spanish (because Alejandro is from Mexico) and one sentence. Order of words was from highest to lowest number of syllables. In this case, interviewer used semantic field of animals. Therefore, he used following words: GATO (cat), MARIPOSA (butterfly), CABALLO (horse), PERRO (dog), and PEZ (fish). The sentence was: EL GATO BEBE LECHE (The cat drinks milk). The interviewer questioned every written word. He asked the child to show with his finger how he says in every written production.

To write for image : This task was divided into two parts. The first analyzed the size and second analyzed the number.

Interviewer used the following image cards: horse-bird and giraffe-worm ( Figure 1 ). Every pair of cards represents a large animal and a small animal.

case study of child in hindi

Cards with large and small animals.

The purpose of this first task was to explore how the child writes when he looks at two images of animals with different size. The animal names have three syllables in Spanish: CA-BA-LLO (horse), PA-JA-RO (bird), etc. In this way, we can see how the child writes.

The interviewer used the following pair of cards for second task ( Figure 2 ).

case study of child in hindi

Cards for singular and plural.

First card shows one animal (singular) and the second shows some animals (plural). In this way, we search to explore how the child produces his writings when he observes one or more objects, if there are similarities or differences to write.

The interviewer asked what was in every card. Next, he asked the child to write something. Alejandro wrote something in every picture. Afterward, the interviewer asked the child to read every word that he wrote. Child pointed with his finger what he wrote.

After, the interview was transcribed for analysis. We read the transcription. The author analyzed every written production. He identified the child’s conceptualizations about writing. He compared the written production and what the child said. In this way, the analysis did not only consist to identify the level of writing development. This text describes the child’s writing, the ways in which he conceptualizes the writing, the difficulties he experienced to write, and his interpretations about writing.

6. Alejandro’s writing

This section describes Alejandro’s writing process. As we already mentioned, Alejandro is 7 years old and he studies in the second grade of the elementary school. His teacher says the child should have a conventional writing, because he has already coursed 1 year of elementary school, but it is not like that. Most of his classmates write a conventional way, but he does not.

We organized this section in three parts. The first part presents how Alejandro wrote his name and how he identifies letters and numbers; the second part refers to the writing of words; and the third part is writing for picture.

6.1 Alejandro writes his name and some letters and numbers

The first part of the task consisted of Alejandro writing his name and some letters and numbers he knows. His name was requested for two reasons. The first reason is to identify the sheet, because the interviewer interviewed other children in the same school. Also, it was necessary to identify every written productions of the group of students. The second reason was to observe the way he wrote his name and how he identified letters and numbers.

The interviewer asked the child to write his name at the top of the sheet. When the interviewer said the instructions, Alejandro was thoughtful during a long time. He was not pressed or interrupted. He did not do anything for several seconds. The child looked at the sheet and looked at everywhere. After time, he took the pencil and wrote the following on the sheet ( Figure 3 ).

case study of child in hindi

Alejandro’s name.

The interviewer looked at Alejandro’s writing. He asked if something was lacking. The interviewer was sure that Alejandro knew his name and his writing was not complete. However, Alejandro was thoughtful, and looked at the sheet for a long time. The interviewer asked if his name was already complete. The child answered “no.” The interviewer asked the child if he remembered his name. Alejandro denied with his head. So, they continued with another task.

Alejandro has built the notion of his name. We believe that he has had some opportunities to write his name. Perhaps, his teacher has asked him to write his name on his notebooks, as part of scholar work in the classroom. We observed that Alejandro used letters with conventional sound value. This is because he wrote three initial letters of his name: ALJ (Alejandro). The first two letters correspond to the beginning of his name. Then, he omits “E” (ALE-), and writes “J” (ALJ). However, Alejandro mentions that he does not remember the others. This may show that he has memorized his name, but at that moment he failed to remember the others, or, these letters are what he remembers.

Subsequently, the interviewer asked Alejandro to write some letters and numbers he knew. The sequence was: a letter, a number, a letter, another letter, and number. In every Alejandro’ writing, the interviewer asked the child what he wrote. In this way, Alejandro wrote the following ( Figure 4 ).

case study of child in hindi

Letters and numbers written by Alejandro.

For this task, Alejandro wrote for a long time. He did not hurry to write. He looked at sheet and wrote. The child looked at the interviewer, looked at the sheet again and after a few seconds he wrote. The interviewer asked about every letter or number.

We can observe that Alejandro differentiates between letter and number. He wrote correctly in every indication. That is, when the interviewer asked him to write a letter or number, he did so, respectively. In this way, Alejandro knows what he needs to write a word and what is not, what is for reading and what is not.

Also, we can observe that the child shows a limited repertoire of letters. He did not write consonants. He used only vowels: A (capital and lower) and E (lower). It shows us that he differentiates between capital and lower letter. Also, he identifies what vowels and letters are because the child answered which they were when the interviewer asked about them.

6.2 Writing words from the same semantic field

Asking the child to write words spontaneously is a way to know what he knows or has built about the writing system [ 12 ]. Although we know Alejandro presents learning difficulties and has not consolidated a conventional writing, it is necessary to ask him to write some words. This is for observing and analyzing what he is capable of writing, what knowledge he has built, as well as the difficulties he experiences.

The next picture presents what Alejandro wrote ( Figure 5 ). We wrote the conventional form in Spanish next to every word. We wrote these words in English in the parentheses too.

case study of child in hindi

List of words written by Alejandro.

At the beginning of the interview, Alejandro did not want to do the task. He was silent for several seconds. He did not write anything. He looked at the sheet and the window. The interviewer insisted several times and suspended the recording to encourage the child to write. Alejandro mentioned he could not write, because he did not know the letters and so he would not do it. However, the interviewer insisted him. After several minutes, Alejandro took the pencil and started to write.

Alejandro wrote every word for 1 or 2 min. He required more seconds or minutes sometimes. He looked at the sheet and his around. He was in silence and looking at the sheet other times. We identified that he needs time to write. This shows that he feels insecure and does not know something for writing. He feels insecure because he was afraid of being wrong and that he was punished by the interviewer for it. It may be that in class he is penalized when he makes a mistake. There is ignorance because he does not know some letters, and he has a low repertoire of the writing system. Thus, Alejandro needs to think about writing and look for representing it. Therefore, this is why the child needs more time to write.

We identified that the child does not establish a phoneme-grapheme relationship. He only shows with his finger from left to right when he read every word. He does not establish a relationship with the letters he used. In each word, there is no correspondence with the number of letters. The child also does not establish a constant because there is variation in number and variety of letters sometimes.

Alejandro used letters unrelated to the conventional writing of the words. For example, when he wrote GATO (cat), Alejandro used the following letters: inpnAS. It is possible to identify that no letter corresponds to the word. Perhaps, Alejandro wrote those letters because they are recognized or remembered by him.

Alejandro shows a limited repertoire of conventional letters. This is observed when he uses four vowels: A, E, I, O. The child used these vowels less frequently. There is one vowel in every word at least. When Alejandro wrote PEZ (fish), he used two vowels. We observed that he writes these vowels at the beginning or end of the word. However, we do not know why he places them that way. Maybe this is a differentiating principle by him.

There is qualitative and quantitative differentiation in Alejandro’s writing. That is, he did not write any words in the same way. All the words written by him are different. Every word has different number and variety of letters. When two words contain the same number of letter, they contain different letters.

When Alejandro wrote MARIPOSA (butterfly), he used five letters. The number of letters is less than what he used for GATO (cat). Maybe he wrote that because the interviewer said “butterfly is a small animal.” This is because the cat is bigger than the butterfly. Therefore, it may be possible that he used lesser letters for butterfly.

In Spanish, PERRO (dog) contains five letters. Alejandro wrote five letters. In this case, Alejandro’s writing corresponds to the necessary number of letters. However, it seems that there is no writing rules for him. This is for two reasons: first, because there is no correspondence with the animal size. Horse is larger than dog and Alejandro required lesser letters for horse than for dog. Second, CABALLO (horse) is composed by three syllables and PERRO (dog) by two. Alejandro used more letters to represent two syllables. In addition, it is observed that there is a pseudo-letter. It looks like an inverted F, as well as D and B, horizontally.

When Alejandro wrote PEZ (fish), the interviewer first asked how many letters he needed to write that word. The child did not answer. Interviewer asked for this again and student said that he did not know. Then, interviewer said to write PEZ (fish). For several minutes, Alejandro just looked the sheet and did not say anything. The interviewer questioned several times, but he did not answer. After several minutes, Alejandro wrote: E. The interviewer asked the child if he has finished. He denied with his head. After 1 min, he started to write. We observed that his writing contains six letters. Capital letters are predominated.

Alejandro used inverted letters in three words. They may be considered as pseudo-letters. However, if we observe carefully they are similar to conventional letters. The child has written them in different positions: inverted.

May be there is a writing rule by Alejandro. His words have a minimum of four letters and a maximum of six letters. This rule has been established by him. There is no relation to the length of orality or the object it represents.

We can identify that Alejandro shows a primitive writing [ 4 ]. He is still in writing system learning process. The phoneticization process is not present yet. The child has not achieved this level yet. He only uses letters without a conventional sound value. There is no correspondence to phoneme-grapheme, and he uses pseudo-letters sometimes.

6.3 To write for image

Write for image allows us to know what happens when the child writes something in front of an image [ 12 ]. It is identified if there is the same rules used by the child, number of letters, or if there is any change when he writes a new word. It may happen that the length of the words is related to the size of the image or the number of objects presented. In this way, we can identify the child’s knowledge and difficulties when he writes some words.

6.3.1 The image size variable

The first task is about observing how the child writes when he is in front of two different sized images. That is, we want to identify if the image size influences on his writings. Therefore, two pairs of cards were presented to Alejandro. Every pair of cards contained two animals, one small and one large. The interviewer asked Alejandro to write the name on each one ( Figure 6 ).

case study of child in hindi

Horse and bird writing.

Based on the writing produced by Alejandro, we mentioned the following:

Alejandro delimits his space to write. When he wrote for first pair of words, the child drew a wide rectangle and he made an oval and several squares for the second pair of words. The child wrote some letters to fill those drawn spaces. It seems that Alejandro’s rule is to fill the space and not only represent the word.

When Alejandro writes the words, we identified that he presents difficulty in the conventional directionality of writing. He wrote most of words from left to right (conventional directionality), but he wrote some words from right to left (no conventional). For example, the child started to write the second word on the left. He wrote seven letters. He looked at the sheet for some seconds. After, he continued to write other letters on the right. He wrote and completed the space he had left, from right to left.

Alejandro shows two ways to write: left–right (conventional) and right–left (no conventional). When he wrote the last word, the child wrote one letter under another. There was no limited space on the sheet. Alejandro wrote it there. The child has not learned the writing directionality.

When we compared Alejandro’s writings, we identified that the number of letters used by him does not correspond to the image size. Although the images were present and he looked them when he wrote, the child took into account other rules to write. The six names of animals had three syllables in Spanish and Alejandro used nine letters for CABALLO (horse) and eleven for PÁJARO (bird). The letters used by him are similar to the conventional ones. However, these are in different positions. There are no phonetic correspondences with the words. The child shows a primitive writing. Alejandro has not started the level of relation between phoneme and grapheme yet. We can believe that the boy wrote some letters to cover the space on the sheet. Alejandro takes into account the card size instead of the image size.

After writing a list of words, the interviewer asked Alejandro to read and point out every word he wrote. The purpose of this task is to observe how the child relates his writing to the sound length of the word. When Alejandro read CABALLO (horse), he pointed out as follows ( Figure 7 ).

case study of child in hindi

Alejandro reads “caballo” (horse).

Alejandro reads every word and points out what he reads. In this way, he justifies what he has written. In the previous example, Alejandro reads the first syllable and points out the first letter, second syllable with the second letter. At this moment, he gets in conflict when he tries to read the third syllable. It would correspond to the third letter. However, “there are more letters than he needs.” When he reads the word, he shows the beginning of phoneticization: relation between one syllable with one letter. This is the syllabic writing principle [ 4 ]. Nevertheless, he has written more letters. Therefore, Alejandro says “o” in the other letters. In this way, we can point out that Alejandro justifies every letters and there is a correspondence between what he reads and what he writes.

When Alejandro reads the second word, the child pointed out as follows ( Figure 8 ).

case study of child in hindi

Alejandro reads “pájaro” (bird).

Alejandro makes a different correspondence syllable-letter than the first word. Although his writing was in two ways, his reading is only one direction: from left to right. The first syllable is related to first three letters he wrote. The second syllable is related to the fourth letter. But, he faces the same problem as in the previous word: “there are many letters.” So he justifies the other letters as follows. He reads the third syllable in relation to the sixth and seventh letter. And, reads “o” for the other letters.

When interviewer showed the next pair of cards, Alejandro wrote as following ( Figure 9 ).

case study of child in hindi

Giraffe and worm writing by Alejandro.

When the interviewer shows the pair of cards to Alejandro, the child said “It’s a zebra.” So, the interviewer said “It’s a giraffe and it’s a worm” and pointed out every card. The interviewer asked Alejandro to write the name of every animal. First, the child draws a rectangle across the width of the sheet. Next, he started to write on the left side inside the rectangle. He said the first syllable “JI” while writing the first letter. After, he said “ra,” he wrote a hyphen. Then, he said “e” and wrote another letter. At that moment, he looked at the sheet and filled the space he left with some letters ( Figure 10 ).

case study of child in hindi

Giraffe writing.

Alejandro shows different rules of writing. These rules are not the same as previous. He delimited the space to write and filled the space with some letters. The child tries to relate the syllable with one letter, but he writes others. There is a limited repertoire of letters too. In this case, it seems that he used the same letters: C capital and lower letter, A capital and lower letter, and O. We believe that he uses hyphens to separate every letter. However, when he wrote the first hyphen, it reads the second syllable. We do not know why he reads there. Alejandro had tried to use conventional letters. He uses signs without sound value. In addition, there is no relation phoneme and grapheme.

When Alejandro wrote GUSANO (worm), he drew a rectangle and divided it into three small squares. Then, he drew other squares below the previous ones. After, he began to write some letters inside the squares, as seen in the following picture ( Figure 11 ).

case study of child in hindi

Worm writing.

Alejandro used other rules to write. They are different than the previous. Alejandro has written one or two letters into every box. At the end, he writes some letters under the last box. There is no correspondence between what he reads and writes. There are also no fixed rules of writing for him. Rather, it is intuited that he draws the boxes to delimit his space to write.

6.3.2 Singular and plural writing

The next task consists to write singular and plural. For this, the interviewer showed Alejandro the following images ( Figure 12 ).

case study of child in hindi

Cards with one cat and four cats.

Alejandro drew an oval for first card. This oval is on the left half of the sheet. He wrote the following ( Figure 13 ).

case study of child in hindi

Alejandro writes GATO (cat).

Next, the interviewer asked Alejandro to write for the second card, in plural. For this, Alejandro draws another oval from the middle of the sheet, on the right side. The child did not do anything for 1 h 30 min. After this time, he wrote some different letters inside the oval ( Figure 14 ). He wrote from right to left (unconventional direction).

case study of child in hindi

Alejandro writes GATOS (cats).

Alejandro wrote in the opposite conventional direction: from right to left. He tried to cover the delimited space by him. His letters are similar to the conventional ones. Also, there are differences between the first and the second word. He used lesser letters for first word than the second. That is, there are lesser letters for singular and more letters for plural. Perhaps, the child took into account the number of objects in the card.

The writing directionality may have been influenced by the image of the animals: cats look at the left side. Alejandro could have thought he was going to write from right to left, as well as images of the cards. Therefore, it is necessary to research how he writes when objects look at the right side. In this way, we can know if this influences the directionality of Alejandro’s writing.

With the next pair of images ( Figure 15 ), the interviewer asked Alejandro to write CONEJO (rabbit) and CONEJOS (rabbits).

case study of child in hindi

Cards with one rabbit and three rabbits.

Alejandro draws a rectangle in the middle of the sheet for the first card (rabbit). He said “cone” (rab-) and wrote the first letter on the left of the sheet. Then, he said “jo” (bit) and wrote the second letter. He said “jo” again and wrote the third letter. He was thoughtful for some seconds. He started to write other letters. His writing is as follows ( Figure 16 ).

case study of child in hindi

Alejandro writes CONEJO (rabbit).

At the beginning, Alejandro tries to relate the syllables of the word with first two letters. However, he justifies the other letters when he read the word. There is no exact correspondence between the syllable and the letter. As well as his writing is to fill the space he delimited.

Alejandro takes into account other rules for plural writing. He drew a rectangle across the width of the sheet. Starting on the left, he said “CO” and wrote one letter. Then, he said “NE” and drew a vertical line. After, he said “JO” and wrote other letters. His writing is as follows ( Figure 17 ).

case study of child in hindi

Alejandro writes CONEJOS (rabbits).

Alejandro writes both words differently. He reads CONEJO (rabbit) for first word and CONEJOS (rabbits) for the second. Both words are different from each other. But, he wrote them with different rules. This is confusing for us because there are vertical lines between every two letters in the second word. We believe that the child tried to represent every object, although he did not explain it.

In summary, Alejandro shows different writings. He used pseudo-letters and conventional letter. These letters are in unconventional positions. There is no relationship between grapheme and phoneme yet; and, he uses different writing rules.

7. Conclusions

We described Alejandro’s writing process. According to this description, we can note the following:

Alejandro is a student of an elementary regular school. He presents learning difficulties. He could not write “correctly.” However, he did not have a full assessment by specialized teachers. His school is so far from urban areas and his parents could not take him to a special institution. Therefore, he has not received special support. Also, there is not a favorable literacy environment in his home. His teacher teaches him like his classmates. Usually, he has been marginalized and stigmatized because “he does not know or work in class.”

We focused on Alejandro because he was a child who was always distracted in class. We did not want to show his writing mistakes as negative aspects, but as part of his learning process. Errors are indicators of a process [ 5 ]. They inform the person’s skills. They allow to identify the knowledge that is being used [ 13 ]. In this way, errors can be considered as elements with a didactic value.

Alejandro showed some knowledge and also some difficulties to write. The child identifies and distinguishes letters and numbers. We do not know if he conceptualizes their use in every one. When he wrote, he shows his knowledge: letters are for reading, because he did not use any number in the words.

The writing directionality is a difficulty for Alejandro. He writes from left to right and also from right to left. We do not know why he did that. We did not research his reasons. But, it is important to know if there are any factors that influence the child to write like this.

The student does not establish a phoneme-grapheme relationship yet. He is still in an initial level to writing acquisition. He uses conventional letters and pseudo-letters to write. There are no fixed rules to write: number and variety of letters. However, we observed student’s thought about writing. He justifies his writings when he reads them and invents letters to represent some words.

There is still a limited repertoire of letters. He used a few letters of the alphabet. Therefore, Alejandro needs to interact with different texts, rather than teaching him letter by letter. Even if “he does not know those letters.” In this way, he is going to appropriate other elements and resources of the writing system.

Time he takes to write is an important element for us. He refused to write for several minutes at the beginning. After, he wrote during 1 or 2 min every word. As we mentioned previously, we believe that Alejandro did not feel sure to do the task. Perhaps, he thought that the interviewer is going to penalize for his writing “incorrectly.” He felt unable to write. Therefore, it is important that children’s mistakes are not censored in the classroom. Mistakes let us to know the child’s knowledge and their learning needs.

We considered that class work was not favorable for Alejandro. He painted letters, drawings, among others. These were to keep him busy. Therefore, it is important for the child to participate in reading and writing practices. In this way, he can be integrated into the scholar activities and is not segregated by his classmates.

About children with learning difficulties, it is important that these children write as they believe. Do not censor their writings. They are not considered as people incapable. It is necessary to consider that learning is a slow process. Those children will require more time than their classmates.

Special education plays an important role in Mexico. However, rather than attending to the student with learning difficulties in isolation, it is necessary that the teacher should be provided with information and the presence of specialized teachers in the classroom. In this way, the student with learning difficulties can be integrated into class, scholar activities, and reading and writing practices.

We presented Alejandro’s writing process in this paper. Although he was considered as a child with learning difficulties, we identified he shows some difficulties, but he knows some elements of the writing system too.

Acknowledgments

I thank Alejandro, his parents, and his teacher for the information they provided to me about him.

Conflict of interest

The authors declare no conflict of interest.

  • 1. SEP. Aprendizajes Clave Para la Educación Integral. Plan y Programas de Estudio Para la Educación Básica. México, D.F.: Secretaria de Educación Pública; 2017. ISBN: 970-57-0000-1
  • 2. SEP. Propuesta Educativa Multigrado 2005. México: Secretaria de Educación Pública; 2005
  • 3. García-Cedillo E, Escalante I, Escandón M, Fernández L, Mustre A, Puga I. La Integración Educativa en el Aula Regular. Principios, Finalidades y Estrategias. México: Secretaría de Educación Pública; 2000. ISBN: 978-607-8279-18-0
  • 4. Ferreiro E, Teberosky A. Los Sistemas de Escritura en el Desarrollo del Niño. México, D.F.: Editorial Siglo XXI; 1979. ISBN 968-23-1578-6
  • 5. Dolz J, Gagnon R, Vuillet Y. Production écrite et Difficultés D’apprentisage. Genève: Carnets des Sciences de L’education. Université de Genéve; 2011. ISBN: 2-940195-44-7
  • 6. INEE. Panorama Educativo de México. Indicadores del Sistema Educativo Nacional 2017. Educación Básica y Media Superior. México: Instituto Nacional para la Evaluación de la Educación; 2018
  • 7. SEP. Modelo Educativo: Equidad e Inclusión. México: Secretaria de Educación Pública; 2017. ISBN: 978-607-97644-4-9
  • 8. SEP. Orientaciones Generales Para el Funcionamiento de los Servicios de Educación Especial. México: Secretaria de Educación Pública; 2016. ISBN: 970-57-0016-8
  • 9. SEP. Estrategia de Equidad e Inclusión en la Educación Básica: Para Alumnos con Discapacidad, Aptitudes Sobresalientes y Dificultades Severas de Aprendizaje, Conducta o Comunicación. México, DF: Secretaria de Educación Pública; 2018
  • 10. Durán M. Las Adecuaciones Curriculares Individuales: Hacia la Equidad en Educación Especial. México: Secretaría de Educación Pública; 2016. ISBN 968-9082-33-7
  • 11. CONAFE. Discapacidad Intelectual. Guía Didáctica Para la Inclusión en Educación Inicial y Básica. México: Secretaria de Educación Pública; 2010
  • 12. Ferreiro E, Gómez M. Análisis de las Perturbaciones en el Proceso de Aprendizaje de la Lecto-Escritura. Fascículo 1. México: SEP-DGEE; 1982
  • 13. Vaca J. Así Leen (Textos) los Niños. Textos Universitarios. México: Universidad Veracruzana; 2006. ISBN: 968-834-753-1

© 2019 The Author(s). Licensee IntechOpen. This chapter is distributed under the terms of the Creative Commons Attribution 3.0 License , which permits unrestricted use, distribution, and reproduction in any medium, provided the original work is properly cited.

Continue reading from the same book

Learning disabilities.

Published: 17 June 2020

By Rakgadi Grace Malapela and Gloria Thupayagale-Tshw...

805 downloads

By Tatiana Volodarovna Tumanova and Tatiana Borisovna...

675 downloads

By Maria Tzouriadou

1042 downloads

IntechOpen Author/Editor? To get your discount, log in .

Discounts available on purchase of multiple copies. View rates

Local taxes (VAT) are calculated in later steps, if applicable.

  • Share full article

For more audio journalism and storytelling, download New York Times Audio , a new iOS app available for news subscribers.

The Daily logo

  • Apple Podcasts
  • Google Podcasts

Why Britain Just Ended 14 Years of Conservative Rule

Last week, the center-left labour party won the british general election in a landslide..

case study of child in hindi

Hosted by Natalie Kitroeff

Featuring Mark Landler

Produced by Rob Szypko ,  Nina Feldman and Will Reid

Edited by Brendan Klinkenberg

With Paige Cowett

Original music by Dan Powell ,  Diane Wong and Marion Lozano

Engineered by Alyssa Moxley

Listen and follow The Daily Apple Podcasts | Spotify | Amazon Music | YouTube

For more than a decade, Britain has been governed by the Conservative Party, which pushed its politics to the right, embracing smaller government and Brexit. Last week, that era officially came to an end.

Mark Landler, the London bureau chief for The Times, explains why British voters rejected the Conservatives and what their defeat means in a world where populism is on the rise.

On today’s episode

case study of child in hindi

Mark Landler , the London bureau chief for The New York Times.

Keir Starmer stands behind a lectern wearing a suit with a red tie and smiling. Behind him is a crowd cheering and waving the U.K. flag.

Background reading

Five takeaways from the British general election.

The Conservatives have run Britain for 14 years. How have things changed in that time?

There are a lot of ways to listen to The Daily. Here’s how.

We aim to make transcripts available the next workday after an episode’s publication. You can find them at the top of the page.

The Daily is made by Rachel Quester, Lynsea Garrison, Clare Toeniskoetter, Paige Cowett, Michael Simon Johnson, Brad Fisher, Chris Wood, Jessica Cheung, Stella Tan, Alexandra Leigh Young, Lisa Chow, Eric Krupke, Marc Georges, Luke Vander Ploeg, M.J. Davis Lin, Dan Powell, Sydney Harper, Michael Benoist, Liz O. Baylen, Asthaa Chaturvedi, Rachelle Bonja, Diana Nguyen, Marion Lozano, Corey Schreppel, Rob Szypko, Elisheba Ittoop, Mooj Zadie, Patricia Willens, Rowan Niemisto, Jody Becker, Rikki Novetsky, Nina Feldman, Will Reid, Carlos Prieto, Ben Calhoun, Susan Lee, Lexie Diao, Mary Wilson, Alex Stern, Sophia Lanman, Shannon Lin, Diane Wong, Devon Taylor, Alyssa Moxley, Olivia Natt, Daniel Ramirez and Brendan Klinkenberg.

Our theme music is by Jim Brunberg and Ben Landsverk of Wonderly. Special thanks to Sam Dolnick, Paula Szuchman, Lisa Tobin, Larissa Anderson, Julia Simon, Sofia Milan, Mahima Chablani, Elizabeth Davis-Moorer, Jeffrey Miranda, Maddy Masiello, Isabella Anderson, Nina Lassam and Nick Pitman.

Natalie Kitroeff is the Mexico City bureau chief for The Times, leading coverage of Mexico, Central America and the Caribbean. More about Natalie Kitroeff

Mark Landler is the London bureau chief of The Times, covering the United Kingdom, as well as American foreign policy in Europe, Asia and the Middle East. He has been a journalist for more than three decades. More about Mark Landler

Advertisement

Case Study File for B.Ed in Hindi PDF Free Download

Case Study File for B.Ed in Hindi PDF: If you’re pursuing a Bachelor of Education (B.Ed) course, you might already be aware of the significance of case study files in your academic journey. A case study file is a comprehensive document that provides insights into real-life situations, allowing students to analyze, evaluate, and make informed decisions based on practical scenarios. In this article, we will explore the importance of case study files in B.Ed education and how they aid in enhancing teaching skills and problem-solving abilities.

Case Study File for B.Ed in Hindi PDF

A case study file is essentially an in-depth investigation of a particular individual, group, or situation. It presents a detailed account of the circumstances, challenges, and outcomes associated with the case. The purpose of these files is to provide students with a platform to apply their theoretical knowledge to real-world situations.

Table of Contents

There are different types of case study files that students encounter during their B.Ed course. These may include illustrative, exploratory, critical instance, or cumulative case studies, each serving a specific purpose in the learning process.

The Relevance of Case Study Files in B.Ed

In the context of B.Ed education, case study files offer a unique way to bridge the gap between theory and practice. As aspiring teachers, B.Ed students need to be well-equipped to handle real-life situations in classrooms effectively. Case study files enable them to gain insights into various teaching methodologies and pedagogical approaches.

Furthermore, these files play a crucial role in assessing students’ problem-solving skills. They encourage critical thinking and help develop creative solutions to challenges that may arise in educational settings.

Creating a Case Study File in Hindi PDF

To create an effective case study file for B.Ed, the first step is selecting a suitable topic. It should be relevant, engaging, and aligned with the learning objectives of the course. Once the topic is chosen, thorough research must be conducted to gather all the necessary data and information related to the case.

The structure of the case study file is vital to its coherence and comprehensibility. It should include an introduction to the case, providing context and setting the stage for the analysis. The background information should offer a glimpse into the circumstances surrounding the case.

The main body should present a detailed description of the case, including observations and relevant facts. It should be followed by an analysis and interpretation of the case, highlighting key takeaways. Finally, the file should conclude with appropriate recommendations based on the analysis.

Components of a Case Study File for B.Ed in Hindi PDF

Introduction to the Case: Introduce the case and its significance in the educational context.

Background Information: Provide relevant details about the individuals or situation involved in the case.

Detailed Description of the Case: Present a comprehensive account of the events and challenges faced.

Analysis and Interpretation: Analyze the case using theoretical frameworks and educational principles.

Conclusion and Recommendations: Summarize the findings and suggest actionable recommendations.

Tips for Writing an Effective Case Study File

To ensure that your case study file stands out, consider the following tips:

Being Clear and Concise: Present information in a straightforward manner, avoiding unnecessary jargon.

Using Proper Formatting and Language: Maintain a professional tone and follow the prescribed formatting guidelines.

Including Real-Life Examples: Supplement your analysis with real-life instances to illustrate key points effectively.

Benefits of Using Hindi PDF Format

One significant advantage of creating case study files in Hindi PDF format is the ease of accessibility. Many students and educators are more comfortable with Hindi, making it convenient for them to understand and engage with the content.

Moreover, PDFs are widely compatible with various devices, making it simple for users to access the files on laptops, tablets, or smartphones.

Download Case Study File for B.Ed in Hindi PDF

Download Case Study

Case Study File Evaluation

During the B.Ed course, case study files are typically evaluated based on specific criteria. Common factors considered include the clarity of presentation, depth of analysis, and relevance to the learning objectives. Feedback from evaluators is essential as it helps students improve their documentation and analytical skills.

Utilizing Case Study Files in B.Ed Teaching

B.Ed instructors can leverage case study files in various ways to enhance the learning experience. In-class discussions and presentations centered around the cases encourage student participation and foster critical thinking abilities. Analyzing the decisions made in different cases can also lead to engaging debates and insights into effective teaching methodologies.

Real-Life Impact of Case Study Files

Graduates who have utilized case study files during their B.Ed course often report a positive impact on their teaching careers. These files have equipped them with practical knowledge, enabling them to address challenges effectively and create dynamic learning environments. As a result, their teaching methodologies have been enriched, leading to better student engagement and academic outcomes.

  • Akash IAS Academy Study Material PDF Free Download
  • CTET Previous Year Question Papers With Answers Download Pdf

Creating a case study file can be time-consuming, especially with thorough research and analysis. Time management skills are crucial to overcome this challenge effectively. Additionally, accessing relevant data may be constrained, but seeking assistance from mentors, peers, or online resources can help address research limitations.

Integrating Technology in Case Study Files

To make case study files more interactive and engaging, educators can incorporate multimedia elements such as videos, infographics, and interactive quizzes. This enhances the overall learning experience and keeps students invested in the content.

Case Study File vs Research Paper

While both case study files and research papers share similarities in terms of analysis and documentation, they differ in their approach. Case study files focus on real-life situations and practical applications, whereas research papers emphasize theoretical research and academic exploration.

Future Trends in Case Study File for B.Ed in Hindi PDF

As technology continues to advance, case study methodology is likely to adapt to incorporate digital elements. Virtual reality simulations and augmented reality scenarios may become prevalent in case study files, offering an immersive learning experience. Additionally, an increased emphasis on diverse perspectives and inclusivity is expected in future case studies.

Case study files play a vital role in the B.Ed curriculum, providing students with a valuable opportunity to apply their theoretical knowledge in practical situations. By creating these files in Hindi PDF format, accessibility and comprehension are enhanced for a broader audience. Aspiring educators can utilize case study files to refine their teaching skills, resulting in more impactful and effective classroom experiences.

FAQs (Frequently Asked Questions)

Are case study files mandatory in b.ed courses.

While it depends on the specific curriculum of the institution, many B.Ed courses do include case study files as part of their assessment and learning process.

Can I use case study files in subjects other than education?

Yes, case study methodology is applicable in various fields like business, psychology, and healthcare, to name a few.

How can I choose an engaging topic for my case study file?

Look for topics that align with your interests and have practical implications in the real world. Brainstorm with your mentors or peers if needed.

What is the ideal length of a case study file?

The length may vary depending on the requirements, but it is best to maintain a balance between being comprehensive and concise.

Can I include interviews in my case study file?

Yes, incorporating interviews with relevant stakeholders can add depth and authenticity to your case study.

Leave a Comment Cancel reply

Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.

IMAGES

  1. Case Study On Girl Child Education In India

    case study of child in hindi

  2. Discussion Of Early Childhood Care And Education Syllabus In Hindi With PDF

    case study of child in hindi

  3. Case Study Of A School Child Hindi

    case study of child in hindi

  4. Case Study On Girl Child Education In India

    case study of child in hindi

  5. The Benefits of Learning Hindi for Children Growing Up in the United States

    case study of child in hindi

  6. Child Development in Hindi, Paper 2 #CBSE #Unacademy #ctet #scert #

    case study of child in hindi

VIDEO

  1. child Hindi kavita/ #automobile /education video/motevation #alwartouristplace

  2. Mrs. Fratelli Case Study

  3. Child abuse /बाल उत्पीड़न

  4. Child study behaviour || daily routine of study || child success celebration || study schedule

  5. how to prepare child Hindi worksheet #kids #learninghindi #vacation #worksheetinhindi #hindimatra

  6. India

COMMENTS

  1. केस स्टडी विधि (Case-Study Method) : आइए आखिर जाने कि केस स्टडी है क्या

    केस स्टडी विधि (Case-Study Method) शिक्षा तकनीकि के आर्विभाव तथा विकास के साथ शिक्षा की प्रक्रिया में अनेक परिवर्तन हुए तथा नये आयामों ...

  2. केस स्टडी विधि के उद्देश्य, विशेषताएं और इस विधि की उपयोगितायेँ

    केस स्टडी विधि (Case-Study Method) शिक्षा तकनीकि के आर्विभाव तथा विकास के साथ शिक्षा की प्रक्रिया में अनेक परिवर्तन हुए तथा नये आयामों ...

  3. Case Study In Hindi Explained

    आपने विस्तार से case study meaning in Hindi के बारे में जाना । सिर्फ केस स्टडी के बारे में विस्तार से जानेंगे बल्कि इसके उदाहरणों और प्रकार को भी आप विस्तार

  4. Case Study Of A School Child Hindi PDF

    Case Study Of A School Child Hindi. A case study is a written account that gives detailed information about a person, group, or thing and their development over a period of time. Your draft should contain at least 4 sections: an introduction; a body where you should include background information, an explanation of why you decided to do this ...

  5. प्राकृतिक आपदाएँ और बाल विवाहः बिहार की एक केस स्टडी

    लगभग 30 प्रतिशत बाल विवाह इस क्षेत्र के चार राज्यों (बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल) में होते हैं. ज़ाहिर है कि विवाह की न्यूनतम ...

  6. Case Study in Hindi Medium || केस स्टडी कैसे करें || B.Ed. Case Study

    Download PDF of this Case Study From Here - https://imojo.in/Beingabestteacher32CONTACT SALES EXECUTIVE FOR BOOKS AND NOTES AT - https://wa.me/message/AI3GER...

  7. केस स्टडी का प्रारूप

    Case Study Format in Hindi. दोस्तों अगर आप Case Study ka Prarup hindi में खोज रहे है तो आप बिलकुल सही जगह पर आये है, क्योंकि आज हमने इस पेज के माध्यम से केस स्टडी का ...

  8. Case Study (Handwritten) in Hindi on Child

    📞 contact sales executive for books, notes & other study material - https://wa.me/message/ai3gery32juxk1 (8860240570 whatsapp)📞 contact sales executive (mr...

  9. Case Study: Meaning, Sources and Limitations

    Read this article in Hindi to learn about:- 1. Meaning of Case Study 2. Characteristics of Case Study 3. Sources of Information 4. Merits 5. Limitations. Contents: व्यक्तिगत अध्ययन पद्धति का अर्थ (Meaning of Case Study) वैयक्तिक अध्ययन पद्धति की विशेषताएँ (Characteristics of Case ...

  10. What Is Case Study Method In Hindi? PDF » PrateekShivalik.in

    What Is Case Study Method In Hindi? PDF Download, व्यक्तिगत अध्ययन , मामले का अध्ययन, केस स्टडी आदि के बारे में जानेंगे। इन नोट्स के माध्यम से आपके ज्ञान में

  11. Case Study Hindi PDF

    case study hindi.pdf - Free download as PDF File (.pdf) or read online for free.

  12. PDF UNICEF

    UNICEF

  13. भारत में चाइल्ड कस्टडी कानून

    चाइल्ड कस्टडी (बच्चे की अभिरक्षा) ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से माता-पिता मे से किसी एक को तलाक (Divorce) या न्यायिक पृथक्करण (Judicial Separation ...

  14. हिंदू विधि भाग 11

    बच्चों की अभिरक्षा (Child Custody) (धारा 26) यह धारा वाद कालीन स्थिति में वाद के पक्षकार पति और पत्नी में उत्पन्न होने वाली संतानों की अभिरक्षा के संबंध में ...

  15. How to Prevent Child Labour in India

    The following case study provides a glimpse of the prompt action taken by CHILDLINE 1098 to rescue children trapped in child labour. Asha, age 12 was working as a domestic worker at an affluent house in Ambala district Haryana for two years.

  16. PLOS Mental Health Community Case Studies: Confronting the Mental

    -Researchers, particularly those based in low- and middle-income countries, should be supported to publish case studies that demonstrate what is working and what is not. -A mapping exercise to document and synthesize relevant guidelines, curricula, and resources in child marriage and mental health should be undertaken.

  17. The Intertwining of Children's Interests and Micro-Practices at a

    Abstract. Children's multiple interests intersect with their participation in informal learning practices in dynamic ways. Using a theoretical framework illustrating interest as a multifaceted construct that has different forms and a range of scope and durability, this study investigates how children's situational interests and individual interests are developed and reinforced and how they ...

  18. Child Drug Addiction & Substance Abuse in India

    According to another report 13.1% of the people involved in drug and substance abuse in India, are below 20 years. Heroin, Opium, Alcohol, Cannabis and Propoxyphene are the five most common drugs being abused by children in India. A survey shows that of all alcohol, cannabis and opium users 21%, 3% and 0.1% are below the age of eighteen.

  19. PDF A Case Study of A Child With Special Need/Learning Difficulty

    A CASE STUDY OF A CHILD WITH SPECIAL NEED/LEARNING DIFFICULTY Researcher Vipan Raj Scholar PhD English Sardar Patel University Balaghat,{MP} Perminent Address: Jagota, Teh: Bhella. District: Doda. State/UT: Jammu & Kashmir. Abstract. The study has been conducted to investigate the levels and kind of difficulty the child/student

  20. Natural Disasters and Child Marriages: A Case Study from Bihar

    The past few months have been a time of great flux in India. While the economic slowdown and the COVID-19 crisis were the media's central focus, two seemingly unrelated reports also appeared in this rapidly moving news cycle: a proposal to increase women's legal age at marriage to 21 and floods in Eastern India. Although child marriage declined from 38.69 percent to 16.1 percent in the ...

  21. The Child with Learning Difficulties and His Writing: A Study of Case

    The purpose of this paper is to present one child with learning difficulties writing process in multigrade rural elementary school in México. It presents Alejandro's case. This boy lives in a rural area. He shows special educational needs about learning. He never had specialized attention because he lives in a marginalized rural area. He was integrated into regular school, but he faced some ...

  22. PDF A Case Study of Child Labour Krishna Raj Fellowship 2012

    Krishna Raj Fellowship 2012. ravarty, Garima Wahi, Jasmine Kaur, Shiny KunduAbstractCh. ld labour is a serious challenge facing the world today. The problem is. particularly acute in the poor and developing economies. India has one of the highest numbers of child labourers i.

  23. Case Study of A School Child Hindi By.

    Case Study of A School Child Hindi By. | PDF. Scribd is the world's largest social reading and publishing site.

  24. PDF A Case Study of a School Child with Emotional and Behavior Problems

    So, in the present case study, Cognitive Behavioral Therapy has been found very effectual in managing the emotional and behavioral problems such as aggressive reactions, adjustment in school, lack of self-confidence, self-criticism, and social incompetence. Case Report The child N.P., 12 years old girl was the student of 6 th grade. The child ...

  25. Why Britain Just Ended 14 Years of Conservative Rule

    The Daily is made by Rachel Quester, Lynsea Garrison, Clare Toeniskoetter, Paige Cowett, Michael Simon Johnson, Brad Fisher, Chris Wood, Jessica Cheung, Stella Tan ...

  26. Case Study File For B.Ed In Hindi PDF Free Download

    Components of a Case Study File for B.Ed in Hindi PDF. Introduction to the Case: Introduce the case and its significance in the educational context. Background Information: Provide relevant details about the individuals or situation involved in the case. Detailed Description of the Case: Present a comprehensive account of the events and challenges faced. ...